वेदांत की स्वामित्व वाली ईएसएल स्टील अपनी उत्पादन क्षमता दोगुनी करने की तैयारी कर रही है। इस योजना को कंपनी ने कोविड-19 महामारी के बाद स्थगित कर दिया था। इस पर निवेश कितना होगा, इस पर अभी काम हो रहा है, लेकिन मोटे तौर पर 3,000 करोड़ रुपये निवेश होने का अनुमान है।
ईएसएल स्टील के मुख्य कार्याधिकारी पंकज मल्हान ने कहा, कोविड-19 के कारण हमारी योजना एक साल आगे बढ़ गई। जिस तरह से चीजें सुधर रही हैं, उसे देखते हुए चौथी तिमाही के आखिर में शुरू करना सही रहेगा। इस मामले में मंजूरी अंतिम चरण में है।
साल 2018 में वेदांत ने ईएसएल स्टील के अधिग्रहण के साथ स्टील कारोबार में कदम रखा था। दिवालिया संहिता के तहत समाधान के 12 मामलों में एक यह भी थी।
लॉन्ग उत्पाद बनाने वाली ईएसएल की उत्पादन क्षमता 22 लाख टन है। जब इसका अधिग्रहण किया गया था तब 12 लाख टन क्षमता चालू की गई थी, जिसे बढ़ाकर 15 लाख टन किया गया। पिछले साल कंपनी ने विस्तार योजना के लिए एम एन दस्तुर को शामिल किया, लेकिन इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मल्हान ने कहा, हम अपनी विस्तार योजना के साथ आगे बढ़ रहे थे, लेकिन कोविड-19 ने इस पर विराम लगा दिया। योजना के तहत उत्पादन क्षमता 15 लाख टन से 30 लाख टन की जाएगी। यह हालांकि पहला चरण है और अगले चरण में उत्पादन क्षमता 60 लाख टन पर पहुंचाई जाएगी। मल्हान ने कहा, जब हम इस रण की शुरुआत करेंगे तो दूसरे चरण की विस्तार योजना पर काम शुरू कर देंगे।
स्टील उद्योग अभी बढ़त की राह पर है और कीमतें कई साल की ऊंचाई पर है। हालांकि विभिन्न कंपनियों के बीच स्प्रेड काफी है, जिनके पास कच्चे माल की खुद की खदान है और जिनके पास नहीं है। इसकी मुख्य वजह लौह अयस्क की बढ़ी कीमतेंं है। सीईओ ने कहा कि देश के पूर्वी इलाके में लौह अयस्क की कीमतें पिछले 4-5 महीने में 120 फीसदी से ज्यादा उछली है।
ओडिशा में नीलामी के बाद उद्योग लौह अयस्क की किल्लत का सामना कर रहा है, जिसकी वजह से कीमतें बढ़ी है। फरवरी व मार्च में हुई 19 खदानों की नीलामी में से सिर्फ पांच ही चालू हो पाएं है क्योंकि बोली भारी प्रीमियम पर लगाई गई थी और इस वजह से वह अनुपयुक्त बन गई। वेदांत ने भी इस नीलामी में हिस्सा लिया था।
एक तरफ उपलब्धता को लेकर समस्या है, वहीं दूसरी ओर कीमतें ऊंची हैं।
वेदांत समूह के तहत कर्नाटक की लौह अयस्क खदान चालू है लेकिन मल्हान ने कहा कि लागत के नजरिये से झारखंड के ईएसएल प्लांट को वहां से आपूर्ति करना उपयुक्त नहीं है। उन्होंने कहा, बाहर से कच्चा माल खरीदने वालों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मार्जिन का संरक्षण है। ऐसे में हमारा ध्यान कार्यक्षमता पर है। यहां तक कि कीमतों के मौजूदा स्तर पर भी मार्जिन के संरक्षण को लेकर भारी दबाव है।
पिछले कुछ महीों में स्टील की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है और देसी मांग सुधर रही है। मॉनसून के बाद निर्माण कार्य में लॉन्ग उत्पादों की बढ़ी हुई मांग की उम्मीद है। मल्हान ने कहा कि दूसरी तिमाही अच्छी रही क्योंकि पहली तिमाही के मुकाबले मार्जिन में सुधार हुआ। हमें तीसरी तिमाही अच्छी रहने की उम्मीद है। मल्हान ने कहा कि अधिग्रहण के आठ महीने में ही ईएसएल लाभ में आ गई।