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Vedanta ने ब्रांड फीस के रूप में लौटाए ₹1,030 करोड़, Viceroy Research का बड़ा खुलासा

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वाइसरॉय रिसर्च ने Vedanta Group पर ब्रांड फीस के नाम पर संदिग्ध फंड ट्रांसफर और ED जांच को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन्हें कंपनी ने खारिज किया है।

Last Updated- July 30, 2025 | 4:09 PM IST
Vedanta
Representative Image

अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) को लेकर एक नई जांच का दावा सामने आया है। केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ के बाद वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड (VRL) ने अपनी ही सब्सिडियरी कंपनी वेदांता लिमिटेड (VEDL) को ₹1,030 करोड़ की ब्रांड फीस वापस लौटाई है। यह खुलासा अमेरिका स्थित निवेशक अनुसंधान संस्था वाइसरॉय रिसर्च (Viceroy Research) ने किया है।

वाइसरॉय की ओर से बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह रकम “ब्रांड फीस रिबेट” के नाम पर लौटाई गई और इसे वेदांता ने FY24 की वित्तीय रिपोर्ट में बिना कोई स्पष्टीकरण दिए दिखाया था। रिपोर्ट का कहना है कि इस ट्रांजैक्शन की जानकारी न तो बॉन्डहोल्डर्स को दी गई और न ही बाजार को।

ED की पूछताछ और CFO की भूमिका

रिपोर्ट में बताया गया है कि जुलाई 2023 में ED ने वेदांता लिमिटेड के तत्कालीन CFO सोनल श्रीवास्तव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को ब्रांड फीस से जुड़े लेन-देन को लेकर तलब किया था। आरोप है कि ये फीस VRL को तब भेजी जाती थी जब ग्रुप को पैसों की जरूरत होती थी। वाइसरॉय का कहना है कि ये ट्रांजैक्शन न तो FEMA कानून के तहत उचित थे और न ही कॉरपोरेट गवर्नेंस नियमों के अनुरूप।

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि CFO सोनल श्रीवास्तव ने ED के समक्ष पेश होकर जवाब दिए जबकि CEO सुनील दुग्गल ने पेशी टाल दी। रिपोर्ट के अनुसार, श्रीवास्तव ने पांच महीने के भीतर पद से इस्तीफा दे दिया।

‘ब्याज मुक्त क्रेडिट सुविधा’ जैसा मॉडल

वाइसरॉय का दावा है कि ब्रांड फीस दरअसल एक ‘ब्याज मुक्त क्रेडिट सुविधा’ की तरह काम कर रही थी, जिसके पीछे कोई स्पष्ट व्यावसायिक तर्क नहीं था। FY25 में ही VEDL और उसकी सहयोगी कंपनियों ने VRL को कुल $361 मिलियन (करीब ₹3,085 करोड़) की ब्रांड फीस दी है, जो VEDL की कुल आय का लगभग 15% है। ये रकम वेदांता ग्रुप के ₹4.9 बिलियन के कुल कर्ज और ₹835 मिलियन की सालाना ब्याज देनदारी को चुकाने में काम आई।

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब वेदांता ग्रुप पर गंभीर आरोप लगे हैं। वाइसरॉय रिसर्च ने 9 जुलाई को जारी 87 पेज की एक रिपोर्ट में वेदांता रिसोर्सेज को एक “परजीवी” कंपनी बताया था, जो अपनी सब्सिडियरी VEDL के संसाधनों को इस्तेमाल कर अपनी कर्ज देनदारियों को निपटा रही है। रिपोर्ट में वेदांता पर “अस्थिर कर्ज, लूटी गई संपत्ति और अकाउंटिंग की चालाकियों” के जरिए साम्राज्य खड़ा करने का आरोप भी लगाया गया था।

इन सभी आरोपों को वेदांता ने सिरे से नकार दिया है। कंपनी का कहना है कि वाइसरॉय की रिपोर्ट “झूठी जानकारी और आधारहीन आरोपों का एक दुर्भावनापूर्ण संयोजन” है, जिसे ग्रुप की छवि खराब करने के इरादे से प्रकाशित किया गया। कंपनी का कहना है कि रिपोर्ट जारी करने से पहले वाइसरॉय ने उनसे संपर्क तक नहीं किया। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने भी वाइसरॉय की रिपोर्ट को “अविश्वसनीय” करार दिया था।

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First Published - July 30, 2025 | 3:31 PM IST

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