facebookmetapixel
Advertisement
WPI: जनवरी में थोक महंगाई बढ़कर 1.81%, लगातार तीसरे महीने आई तेजीAI Impact Summit 2026: टेक दिग्गज बोले- कई नई नौकरियां पैदा होंगी; शांत रहें, नई ​स्किल सीखेंAI Impact Summit 2026: CBSE बोर्ड परीक्षा के बीच दिल्ली में AI सम्मेलन, ट्रैफिक को लेकर दिल्ली पुलिस ने जारी की एडवाइजरीAI से खत्म हो जाएगा भारतीय IT फर्म्स का दबदबा? Motilal Oswal ने आगे की राह और चुनौतियों पर दी बड़ी रिपोर्टAI ट्रांसफॉर्मेशन में भारत सबसे आगे: पीएम मोदीAI Impact Summit 2026: दिल्ली में आज से वैश्विक एआई महाकुंभ, दुनिया की नजर भारत पर; जानें पूरा शेड्यूलAye Finance IPO Listing: 97% सब्सक्रिप्शन के बाद फीकी शुरुआत, ₹129 पर सपाट लिस्ट हुए शेयरFractal Analytics IPO की फ्लैट लिस्टिंग, ₹900 रुपये पर लिस्ट हुए शेयर; निवेशकों को नहीं मिला फायदाGold, Silver Price Today: चांदी में ₹5,871 की गिरावट, सोना भी फिसला; जानें MCX पर किस भाव खुला कारोबारमिडकैप-स्मॉलकैप का दौर आने वाला! FY27 में बदल सकती है बाजार की तस्वीर

AI से खत्म हो जाएगा भारतीय IT फर्म्स का दबदबा? Motilal Oswal ने आगे की राह और चुनौतियों पर दी बड़ी रिपोर्ट

Advertisement

विश्लेषण के अनुसार मौजूदा शेयर कीमतें यह संकेत देती हैं कि बाजार आने वाले दस वर्षों में इस क्षेत्र की नकद कमाई में औसतन लगभग 6.5 प्रतिशत सालाना बढ़त की उम्मीद कर रहा है।

Last Updated- February 16, 2026 | 11:53 AM IST
Indian IT sector outlook
Representational Image

Indian IT sector outlook: निफ्टी आईटी इंडेक्स 2026 में अब तक करीब 15 प्रतिशत गिर चुका है। यह साल 2025 में आईटी इंडेक्स में आई 12.6 प्रतिशत गिरावट से भी ज्यादा है। हालिया गिरावट के बाद फरवरी में आईटी सेक्टर की 10 कंपनियों का कुल मार्केट कैप 50 अरब डॉलर से ज्यादा घट गया। आईटी शेयरों का भारतीय बाजार में करीब 10 प्रतिशत हिस्सा है और इनका असर निफ्टी और सेंसेक्स जैसे बड़े इंडेक्स पर काफी ज्यादा पड़ता है।

जानकारों का कहना है कि निवेशकों को चिंता है कि भारतीय आईटी कंपनियां अपनी कमाई और प्रोडक्टिविटी बनाए रख पाएंगी या नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण काम ऑटोमेट हो सकता है और प्रोजेक्ट जल्दी पूरे हो सकते हैं। ये घरेलू आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल के लिए बड़ी चुनौती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आईटी कंपनियों के कामकाज पर असर पड़ने की लगातार आशंका और अमेरिका में जल्द ब्याज दर घटने की उम्मीद कमजोर पड़ने से निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।

इस महीने की शुरुआत में अमेजन और गूगल के समर्थन वाली कंपनी ने एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल पेश किया। यह टूल कई काम अपने आप कर सकता है। इसके बाद दुनिया भर के टेक्नीकल शेयरों पर दबाव बढ़ा और यह चिंता भी बढ़ी कि भारतीय आईटी कंपनियों की सर्विसेज की मांग पर असर पड़ सकता है।

चार फरवरी से शुरू हुई गिरावट के बाद घरेलू आईटी शेयर करीब 15 प्रतिशत टूट चुके हैं। इस गिरावट के चलते टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, जो पहले देश की चौथी सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनी थी, अब छठे स्थान पर आ गई है।

AI का खतरा कितना बड़ा ?

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की हाल की एक रिपोर्ट में विश्लेषकों ने यह समझाने की कोशिश की है कि बाजार भारतीय आईटी सर्विसेज के बारे में क्या सोच रहा है और क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा खतरा वास्तव में उतना बड़ा है जितना माना जा रहा है।

विश्लेषण के अनुसार मौजूदा शेयर कीमतें यह संकेत देती हैं कि बाजार आने वाले दस वर्षों में इस क्षेत्र की नकद कमाई में औसतन लगभग 6.5 प्रतिशत सालाना बढ़त की उम्मीद कर रहा है। यह पहले के मुकाबले काफी कम है।

उदाहरण के तौर पर, वैश्विक वित्तीय संकट के समय नकद कमाई में वृद्धि दर करीब 40 प्रतिशत थी। वर्ष 2016 से 2019 के बीच जब वृद्धि धीमी हुई थी तब यह 13 प्रतिशत थी और हाल के वर्षों में यह करीब 8.5 प्रतिशत रही।

रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र की लगभग 12 से 15 प्रतिशत आय पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सीधा असर पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे काम तेजी से होने लगेगा और कुछ कामों की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि इसका असर कब और कितना होगा, यह अभी साफ नहीं है।

आगे क्या हो सकता है ?

मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों ने एआई के बढ़ते प्रभाव के मामले में दो संभावनाएं बताई हैं। पहली संभावना में अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर जल्दी दिखता है, तो अगले कुछ वर्षों में आय की बढ़त काफी धीमी हो सकती है और बड़ी कंपनियों की प्रति शेयर कमाई में करीब 10 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

दूसरी संभावना में, अगर बड़ी कंपनियों के जटिल सिस्टम, पुराने स्ट्रक्चर और नियमों के कारण नई तकनीक अपनाने में समय लगता है, तो शॉर्ट टर्म में कारोबार में सुधार मुख्य भूमिका निभाएगा और नई तकनीक का असर धीरे-धीरे दिखेगा।

रिपोर्ट के अनुसार हाल के समय में कुल आय और स्ट्रक्चरल प्रॉफिट का ग्रोथ रेट नीचे से संभलते दिखा है और हाल की तिमाही में बड़ी, मध्यम और छोटी कंपनियों में सुधार नजर आया है। लंबे समय की चिंता यह है कि अगर कंपनियां खुद ही कोड बनाने लगें तो बाहरी सर्विसेज देने वाली कंपनियों पर उनकी निर्भरता घट सकती है।

हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले भी कंपनियों ने खुद का बनाया सॉफ्टवेयर संभालने में कठिनाई का सामना किया था। इसमें सिक्योरिटी और रखरखाव की समस्याएं थीं। इसी कारण समय के साथ वे तैयार सॉफ्टवेयर और एक्सपर्ट्स कंपनियों की मदद लेने लगीं। अभी खुद से बनाया गया सॉफ्टवेयर कुल खर्च का केवल 14 प्रतिशत है, जबकि 1990 के दशक में यह 35 से 40 प्रतिशत तक था।

विश्लेषकों का मानना है कि केवल अंदर ही कोड बना लेना बेहतर स्ट्रक्चर, सिक्योरिटी या बिना किसी रूकावट के कामकाज की गारंटी नहीं देता। सर्विस देने वाली कंपनियां आज भी सिस्टम जोड़ने, साइबर सुरक्षा, नियमों का पालन, कामकाज को बेहतर बनाने और रुकावटों को कम करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

Advertisement
First Published - February 16, 2026 | 11:33 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement