तू त्तुकुडी में स्टरलाइट कॉपर इकाई पुन: खोलने के प्रयास लगभग समाप्त होने के बाद अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांत ने अब इस संयंत्र को बेचने का निर्णय लिया है। इसके लिए कंपनी ने इच्छुक पक्षों से अभिरुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित किए हैं।
सोमवार को एक अखबार में प्रकाशित विज्ञापन के जरिये कंपनी ने 4 जुलाई तक ईओआई सौंपने के लिए वित्तीय रूप से सक्षम कंपनियों को आमंत्रित किया। यह बोली ऐक्सिस कैपिटल के साथ मिलकर आमंत्रित की गई थी।
वेदांत के एक अधिकारी ने कहा, ‘तूतीकोरिन संयंत्र एक राष्ट्रीय संपत्ति है जो तांबे के लिए हमारे देश की 40 प्रतिशत जरूरत पूरी करती है और उसने भारत को तांबे के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम योगदान दिया है। देश और तमिलनाडु के लोगों के श्रेष्ठ हित में, हम यह सुनिश्चित करने के विकल्प तलाश रहे हैं कि संयंत्र और परिसपत्तियों का देश में तेजी से बढ़ रही जरूरत को पूरी करने में सही इस्तेमाल किया जाए।’
स्टरलाइट-विरोधी प्रदर्शन से पुलिस फायरिंग की घटना के बाद स्टरलाइट कॉपर ने वर्ष 2018 से स्मेल्टर और रिफाइनिंग कॉम्पलेक्स में उत्पादन बंद कर दिया था। इस फायरिंग में करीब 13 लोग मारे गए थे और 102 घायल हुए थे। विरोध प्रदर्शन कंपनी द्वारा क्षमता 400,000 टन से बढ़ाकर 800,000 टन किए जाने के विरोध में किया गया था।
मई 2018 में फायरिंग के बाद, वेदांत की स्टरलाइट कॉपर इकाई तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) द्वारा जारी आदेश के बाद पिछले चार साल तक बंद रही थी। तूत्तुकुडी में स्थानीय मत्स्य समुदाय का मानना है कि संयंत्र को बेचने के बजाय इस क्षेत्र से हटाया जाना चाहिए।
तूत्तुकुडी में कंट्रीबोट फिशरमैन एसोसिएशन के समन्वयक मारिया राजाबोस रीगन ने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि कुछ अन्य कंपनियां दूसरे तरीके से परिचालन पुन: शुरू कर रही हैं।
हम संयंत्र की बिक्री के बजाय इसके
पूरी तरह से प्रतिस्थापन पर जोर देना चाहते हैं। ‘ थूटूकुडी ऐसा पहला स्थान नहीं है, जहां वेदांत समूह को विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ रहा है। वेदांत की तांबा सहायक इकाई कोंकोला कॉपर माइंस (केसीएम) को जाम्बियाई कॉपरबेल्ट में इसी तरह के विरोध का सामना करना पड़ा था, जब स्थानीय लोगों ने उसकी खदानों और स्मेल्टरों का विरोध किया था। वर्ष 2013 में ओडिशा में आदिवासी समूहों ने नियमगिरि हिल्स में खदान लगाने के वेदांत एल्युमीनियम के प्रस्ताव का विरोध किया।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
भारत स्टरलाइट की इकाई बंद होने से पहले तांबे के निर्यातक के तौर पर इसका इस्तेमाल करता था, और अब वह शुद्ध आयातक बन गया है। सोमवार को कंपनी के विज्ञापन में कहा गया कि संयंत्र तांबे के लिए भारत की करीब 40 प्रतिशत मांग का उत्पादन करता और सरकारी खजाने में करीब 2,500 करोड़ रुपये का का योगदान तथा तूत्तुकुडी बंदरगाह के राजस्व में 12 प्रतिशत और तमिलनाडु में सल्फरिक एसिड की 95 प्रतिशत बाजार भागीदारी में मददगार था।
भारत ने निर्यात 2017-18 के 419 हजार टन (केटी) से घटकर2021-22 में 87 केटी रह गया और आयात समान अवधि में 215 केटी से बढ़कर 241 केटी पर पहुंच गया। देश को तांबा आयात की वजह से 2021-22 में करीब 1.2 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा निकासी का नुकसान हुआ था।