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MTNL की कर्ज समस्या के लिए वित्त मंत्रालय से मदद की मांग, कंपनी पर ₹8,400 करोड़ का बकाया

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सरकारी बैंकों का एमटीएनएल पर कुल बकाया 8,415.55 करोड़ रुपये है।

Last Updated- May 22, 2025 | 12:30 AM IST
MTNL
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बीमार चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उद्यम  महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) की देनदारियों के भुगतान के लिए  दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने वित्त मंत्रालय से मदद मांगी है। इसके पहले वित्त मंत्रालय ने एमटीएनएल के बकाये पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से आंशिक ऋण माफी की मांग के दूरसंचार विभाग के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न सार्वजनिक किए जाने की शर्त पर बताया, ‘दूरसंचार विभाग ने वित्त मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें अतिरिक्त धन की मांग की गई है। इस पर अभी वित्त मंत्रालय को फैसला करना है। उन्हें एमटीएनएल की संपत्तियों का कुछ करना चाहिए।  विभाग को एक स्पष्ट योजना के साथ आना चाहिए।’ छपने तक इस सिलसिले में वित्त मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिल सका।

सरकारी बैंकों का एमटीएनएल पर कुल बकाया 8,415.55 करोड़ रुपये है। फरवरी में बिज़नेस स्टैंडर्ड ने खबर दी थी कि वित्त मंत्रालय ने एमटीएनएल के इस आग्रह को अस्वीकार कर दिया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अपना ऋण आंशिक रूप से माफ करना चाहिए। अधिकारी ने कहा, ‘एमटीएनएल के पास दिल्ली और मुंबई के प्रमुख स्थानों पर संपत्तियां हैं। बहरहाल उनका रुख साफ नहीं है और क्रियान्वयन का अभाव है। यही वजह है कि वे उन संपत्तियों का मुद्रीकरण नहीं कर पा रहे हैं।  अन्यथा प्रमुख इलाकों में स्थित ऐसी संपत्ति के लिए खरीदारों की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।’

लोकसभा को दिए गए लिखित जवाब में संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने कहा था कि बीएसएनएल और एमटीएनएल केवल उन जमीनों और भवनों से धन जुटा रही हैं, जो उनके इस्तेमाल में नहीं आ रही हैं और निकट भविष्य में भी उनकी उपयोगिता नहीं है और उसे इनके मालिकाना के हस्तांतरण का हक है।

मंत्री ने सूचित किया था कि 2019 और जनवरी 2025 के बीच गैर प्रमुख (भूमि और इमारत) और प्रमुख (टॉवर और फाइबर) संपत्तियों से एमटीएनएल की कमाई क्रमशः 2,134.61 करोड़ रुपये और 285.25 करोड़ रुपये रही है।

अगस्त 2024 में चंद्रशेखर ने राज्यसभा को सूचित किया था कि एमटीएनएल ने 2024-25 के सॉवरिन गारंटी बॉन्डों (एसजीबी) के ब्याज के भुगतान के लिए 1,151.65 करोड़ रुपये की मांग की है।  उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एमटीएनएल को दिए गए ऋणों को गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए)की श्रेणी में डाल दिया, जिनमें मूलधन और ब्याज दोनों बकाया शामिल है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया अगस्त 2024 में एमटीएनएल ऋण को एनपीए के रूप में वर्गीकृत करने वाला पहला बैंक है, जबकि इंडियन ओवरसीज बैंक इस साल फरवरी में ऋण को खराब ऋण के रूप में वर्गीकृत करने वाला आखिरी बैंक है।

जिन 7 सरकारी बैंकों का एमटीएनएल पर बकाया है, उनमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (3,664.09 करोड़ रुपये), इंडियन ओवरसीज बैंक (2,393.81 करोड़ रुपये), बैंक ऑफ इंडिया (1,085.20 करोड़ रुपये), पंजाब नैशनल बैंक (467.65 करोड़ रुपये), भारतीय स्टेट बैंक (354.41 करोड़ रुपये) यूको बैंक (268.63 करोड़ रुपये) और पंजाब ऐंड सिंध बैंक (181.76 करोड़ रुपये) शामिल हैं। पिछले साल से एमटीएनएल इन ऋणों के भुगतान में चूक कर रहा है।

वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में एमटीएनएल ने बताया था कि उसे 836 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। इसके पहले के वित्त वर्ष की समान तिमाही में हुए 839 करोड़ रुपये घाटे की तुलना में यह मामूली कम था। कंपनी की एबिटा (ब्याज के पहले कमाई, कर, मूल्यह्रास और ऋण मुक्ति) हानि भी बढ़ी है। यह 128.1 करोड़ रुपये हो गई है।

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First Published - May 22, 2025 | 12:30 AM IST

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