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सुजलॉन ने किया अमेरिका से करार

Last Updated- December 07, 2022 | 3:42 AM IST

पवन ऊर्जा के उपकरण बनाने वाली नामी कंपनी सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्रालय के साथ एक समझौता किया है।


इसके तहत कंपनी गुणवत्ता और विनिर्माण मानकों में सुधार करेगी, ताकि अमेरिका 2030 तक अपनी बिजली का 20 फीसद हिस्सा पवन ऊर्जा के स्रोतों से हासिल करने लगे।

दो साल के इस करार में सुजलॉन के अलावा जीई एनर्जी, सीमेंस पावर जेनरेशन, वेस्तास विंड सिस्टम्स, क्लिपर टरबाइन वर्क्स और गमेसा कॉर्पोरेशन ने भी हस्ताक्षर किए हैं। ये सभी कंपनियां अमेरिका में पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेंगी।

अमेरिकी मंत्रालय से जारी बयान के मुताबिक ये कंपनियां साथ मिलकर टरबाइन के पुर्जों की गुणवत्ता सुधारेंगी और उन्हें लगाने तथा उनके परिचालन में आने वाले खर्च को भी कम करने की कोशिश करेंगी। इसके अलावा सभी साझेदार पर्यावरण और प्रौद्योगिकी से संबंधित तमाम मसलों पर काम करेंगी और नए मानक भी तय करेंगी।

अमेरिका पवन ऊर्जा का सबसे तेजी से बढ़ता बाजार है। पिछले 5 साल से ही इसमें सालाना 30 फीसद की दर से इजाफा हो रहा है। पिछले साल इसमें लगभग 9 अरब डॉलर के निवेश के साथ 5,000 मेगावाट से ज्यादा विद्युत उत्पादन क्षमता जोड़ी गई। इस समय अमेरिका में पवन ऊर्जा से 16,818 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। अमेरिका में प्राकृतिक गैस के बाद इस समय पवन ऊर्जा ही बिजली का उत्पादन करने वाली दूसरी सबसे बड़ी नई स्रोत है।

सुजलॉन का इस बाजार में लगभग 8 फीसद हिस्से पर कब्जा है। पिछले 2-3 साल में ही उसने बाजार में यह हिस्सेदारी हासिल की है। उसे अगले 2 साल में टैक्सस की कंपनी होइजन विंड एनर्जी के लिए 600 मेगावाट क्षमता वाले उपकरणों की आपूर्ति करनी है।

First Published - June 4, 2008 | 9:58 PM IST

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