बीएस बातचीत
प्रमुख आईटी सेवा कंपनी टेक महिंद्रा के दूसरी तिमाही के नतीजे से अन्य कंपनियों के बीच दिखे रुझान की झलक मिलती है। कंपनी के एमडी एवं सीईओ सीपी गुरनानी ने शिवानी शिंदे से बातचीत में कहा कि कंपनी ने पिछले एक दशक में बेहतरीन दूसरी तिमाही का प्रदर्शन दर्ज किया है। पेश हैं मुख्य अंश:
अगली कुछ तिमाहियों के दौरान वृद्धि कैसी रहेगी?
टेक महिंद्रा की वृद्धि को चार कारकों से रफ्तार मिलती है जिसे हम ‘फोर सी’ कहते हैं। पहला हमारा महिंद्रा ब्रिटिश टेलीकॉम का विरासत है और हमारी एक विरासत कनेक्टिविटी है। इसलिए हम कनेक्टेड सॉल्यूशंस पर ध्यान केंद्रित करते हैं। दूसरा, हमने ब्लू मार्बल प्लेटफॉर्म में काफी निवेश किया है जिसका अधिग्रहण हमने वोडाफोन से किया था। ग्राहक अनुभव प्रबंधन के लिए हमने एक डिजिटल कंटेंट कंपनी बोर्न के अधिग्रहण के जरिये एजेंसी कारोबार में काफी निवेश किया है। हमारे लिए तीसरा वाहक क्लाउड है और यदि आप प्रमुख हाइपरस्केलर पर गौर करेंगे तो उसमें काफी वृद्धि दिखेगी चाहे वे एडब्ल्यूएस हो अथवा गूगल, माइक्रोसॉफ्ट अथवा आईबीएम। इन सब को मिलाकर एक ताकत बनती है जो हमारे ग्राहकों की डिजिटलीकरण यात्रा में मदद करती है। हमने संकेत दिया है कि हर तिमाही हमारे टीसीवी का दायरा 70 करोड़ डॉलर से 90 करोड़ डॉलर होगा।
कुल कितने टीसीवी पर हस्ताक्षर किए गए हैं? वृद्धि को कहां से रफ्तार मिल रही है?
सौदे पर हस्ताक्षर के लिहाज से हमारा समग्र प्रदर्शन बेहतर रहा है। अधिक हस्ताक्षरित सौदे विरासत डिजिटल संरक्षण के क्षेत्र से हैं। भौगोलिक लिहाज से इन सौदों को अमेरिका और यूरोप में बांटा जा सकता है। इसलिए हमने जो सौदे किए हैं उनमें एक फॉच्यून 500 कंपनी के साथ बहुवर्षीय रणनीतिक सौदा भी है। इसके अलावा हमने अन्य कंपनियों के साथ भी करार किए हैं।
जब आप नए तकनीकी सौदों पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो आपकी अधिग्रहण रणनीति कितनी महत्त्वपूर्ण हो जाती है?
हम अपनी रणनीति के तहत अधिग्रहण को जारी रखेंगे। हम मुख्य प्रबंधन टीम में कुछ अधिग्रहित कंपनियों के नेतृत्व को लाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। इसलिए, अधिग्रहण क्षमता में विस्तार के साथ-साथ प्रबंधन बैंडविड्थ के लिए भी हैं।
कर्मचारियों द्वारा कंपनी छोडऩे की दर 21 फीसदी पर काफी अधिक है। इससे आप किस प्रकार निपट रहे हैं?
व्यक्तिगत तौर पर मैंने 1998-99 में भी ऐसी ही एक चुनौती का सामना किया था। उस दौरान हमने उपयुक्त कौशल की खोज के लिए दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया तक गए थे। हालांकि इस बार भी हम आसपास के क्षेत्रों पर गौर कर रहे हैं ताकि वहां से प्रतिभाओं को आकर्षित किया जा सके। इसके अलावा हमारी नजर छोटे शहरों पर भी है।