facebookmetapixel
Advertisement
वैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडरकोटक बैंक ने सावधि जमा धोखाधड़ी मामले में दर्ज की शिकायत

Byju’s और BCCI की याचिकाएं खारिज, थिंक ऐंड लर्न के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई जारी रहेगी

Advertisement

एनसीएलएटी के फैसले में कहा गया कि थिंक ऐंड लर्न की दिवालिया प्रक्रिया को वापस लेने के आवेदन को लेनदारों की समिति (सीओसी) के 90 प्रतिशत सदस्यों की मंजूरी की आवश्यकता है।

Last Updated- July 21, 2025 | 11:09 PM IST
Byju's

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और ऋजु रवींद्रन की उन अपीलों को खारिज कर दिया जिनमें बैजूस की पैतृक कंपनी ​थिंक ऐंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड के ​खिलाफ दिवालिया कार्रवाई वापस लेने की मांग की गई थी।

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने इस साल अप्रैल में बीसीसीआई और रिजु रवींद्रन की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था जिनमें एडटेक कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही रोकने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

एनसीएलएटी के फैसले में कहा गया कि थिंक ऐंड लर्न की दिवालिया प्रक्रिया को वापस लेने के आवेदन को लेनदारों की समिति (सीओसी) के 90 प्रतिशत सदस्यों की मंजूरी की आवश्यकता है। यह मामला थिंक ऐंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (टीएलपीएल) और बीसीसीआई के बीच एक समझौते से जुड़ा है। बीसीसीआई ने जुलाई 2024 में स्पॉन्सर​शिप बकाया को लेकर दिवालिया प्रक्रिया शुरू की थी।

एनसीएलएटी में दायर अपील के अनुसार बैजूस के प्रमोटरों ने अगस्त 2024 में बीसीसीआई से समझौता कर लिया था और पूरी निपटान राशि एस्क्रो में जमा कर दी थी। हालांकि, विदेशी ऋणदाता जीएलएएस ट्रस्ट कंपनी एलएलसी (जो लगभग 1.2 अरब डॉलर के ऋणदाताओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है) ने इस निकासी को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया। बाद में अन्य ऋणदाताओं ने भी इस समझौते पर आपत्ति जताई। बैजूस और बीसीसीआई ने इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।

Advertisement
First Published - July 21, 2025 | 10:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement