ऐक्सिस बैंक में स्पेसिफाइड अंडरटेकिंग ऑफ द यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडियाज (सूटी) की शेयरधारिता घटाने की केंद्र की पहल से विनिवेश की उम्मीद मजबूत हुई है। पिछले सप्ताह सरकार ने ऐक्सिस बैंक में खुले बाजार में 220 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस सौदे को बगैर किसी औपचारिक घोषणा के पूरा किया गया और इसका खुलासा इस सप्ताह हो सका है।
बाजार कारोबारियों का कहना है कि सरकार को सूचीबद्घ पीएसयू में शेयर बिक्री के लिए इसी तरह की रणनीति अपनानी चाहिए। उनका कहना है कि पूर्व घोषणा से अक्सर शेयरों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को बढ़ावा मिलता है जिससे सरकार के साथ साथ अन्य शेयरधारकों को भी नुकसान होता है। सरकार सामान्य तौर पर सूचीबद्घ कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) विकल्प का इस्तेमाल करती है। इसके तहत, विक्रेता को सौदे के विवरण की घोषणा कम से कम एक दिन पहले करनी होती है। अक्सर सेकंडरी बाजार में कीमतें पीएसयू के मामले में विक्रेता द्वारा निर्धारित आधार मूल्य के अनुरूप रहती हैं। इससे शेयर बिक्री के लिए मांग प्रभावित होती है।
विश्लेषकों का कहना है कि ओएफएस के बजाय, सरकार खुले बाजार के विकल्प का इस्तेमाल (जो भी संभव हो)कर सकती है। सरकार ने 26 और 27 नवंबर के बीच ऐक्सिस बैंक के 36 लाख शेयर बेचे। शेयर कीमत में ज्यादा उतार-चढ़ाव के बगैर इस आपूर्ति को बाजार द्वारा आसानी से खपाया गया था। पिछले चार सप्ताहों में, ऋणदाता का शेयर 20 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गया था।
प्राइम डेटाबेस के संस्थापक पृथ्वी हल्दिया ने कहा, ‘ओएफएस का विकल्प कीमत निर्धारण का श्रेष्ठ रास्ता नहीं है। मौजूदा समय में, बाजार इसे लेकर उत्साहित हैं कि यदि वे दैनिक बिक्री बरकरार रखते हैं तो वे महीने के आखिर में अच्छी मात्रा में बिकवाली में सफल रहेंगे।’
कई सूचीबद्घ कंपनियों में सूटी के जरियेसरकार की हिस्सेदारी है जिसे उसने बेचने की योजना बनाई है। सूटी होल्डिंग की ज्यादातर वैल्यू महज दो शेयरों – आईटीसी और ऐक्सिस बैंक में है। मौजूदा बाजार भाव पर इन दो कंपनियों में यह हिस्सेदारी 27,000 करोड़ रुपये है।
सरकार के साथ एक ताजा बातचीत में, देश के प्रमुख फंड प्रबंधकों ने विनिवेश प्रक्रिया बेहतर ढंग से चलाए जाने का अनुरोध किया था। प्रतिक्रियाएं मिलने के बाद, सरकार ने विविनेश लक्ष्य पूरा करने के लिए ईटीएफ विकल्प का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय लिया है।