प्रदूषण में कमी लाने की लागत को टैरिफ पर डालने की व्यवस्था देकर विद्युत अपीली अधिकरण (एपीटीईएल) ने पंजाब सरकार से कहा है कि वह वेदांत की कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड और लार्सन ऐंड टुब्रो की नाभा पावर लिमिटेड द्वारा किए गए निवेश को कानून में दी गई राहत के हिसाब से देखे।
अधिकरण के इस फैसले से कंपनियों को एफजीडी (फ्लू-गैस डीसल्फराइजेशन) स्थापित करने की लागत राज्य की स्वामित्व वाली विद्युत वितरण कंपनी द्वारा भुगतान किए जाने वाले टैरिफ से निकालने की अनुमति होगी। एफजीडी लगाने की सिफारिश पर्यावरण मंत्रालय के नियमों के तहत की गई थी।
इसी दौरान एपीटीईएल महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की तरफ राज्य के एक नियामक के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील को खारिज कर दिया। नियामक ने इस आदेश में अदाणी पावर की 3,300 मेगावॉट क्षमता की तिरोदा संयंत्र को बढ़ी हुई लागत टैरिफ पर डालने की अनुमति दी थी।
वेदांत की स्टरलाइट पावर लिमिटेड ने 1 सितंबर, 2008 को पंजाब सरकार की विशेष उद्देश्य की कंपनी के अधिग्रहण के लिए हिस्सेदारी खरीद समझौता किया था। उसी दिन टीएसपीएल और तब के पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के बीच उसके 1980 (3 गुना 660) मेगावॉट संयत्र से बिजली की बिक्री के लिए एक विद्युत खरीद समझौता (पीपीए) किया गया था।
कंपनी ने आरोप लगाया है कि इस समझौते के करीब 7 वर्ष बाद वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 7 दिसंबर 2015 को पर्यावरण (सुरक्षा) नियम, 1986 को संशोधित कर दिया।