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मंदी ने उतारी इंडेज विंटनर्स की खुमारी

Last Updated- December 10, 2022 | 6:56 PM IST

देश की सबसे बड़ी वाइन निर्माता कंपनी इंडेज विंटनर्स (पहले शैंपेन इंडेज) ने वैश्विक बाजार में मुनाफे पर बढ़ते दबाव की वजह से अब नई रणनीति अपनाने का फैसला किया है।
इस त्रिस्तरीय रणनीति का मकसद इस साल कंपनी के मुनाफे को बरकरार रखना होगा। कंपनी के प्रबंध निदेशक रणजीत चौगुले के मुताबिक इस रणनीति के तहत कंपनी पुनर्गठन करने वाली है।
इस कवायद के तहत कंपनी अपने वैश्विक शोध, उत्पादन और बैंकिंग, कैशियर, स्टॉक व परिसंपत्तियों के लिए इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सिस्टम (ईआरपी) को एक ही छतरी के नीचे लेकर आएगी।
उनका कहना है कि, ‘मंदी की वजह से हमारे मुनाफे पर असर पड़ा है। उपभोक्ता अब कम पैसे में ज्यादा चीज लेना चाहते हैं। हम उन्हें ज्यादा देने पर काफी रकम खर्च कर रहे हैं। इसके लिए हमने कई प्रमोशन ऑफर्स की भी शुरुआत की है।
पहले लोग पांच डॉलर में छह बोतल खरीदने को तैयार थे, लेकिन अब वही लोग उतनी ही रकम हमें आठ बोतलों की मांग कर रहे हैं। वे अब कम पैसे में ज्यादा लेना चाहते हैं। इसके मुकाबले भारत में मुनाफा काफी ज्यादा है। पुनर्संरचन की इस कवायद से हम अगले वित्त वर्ष में 35 करोड़ रुपये की लागत बचा लेंगे।’
दिसंबर में खत्म हुई तिमाही में कंपनी की बिक्री में पिछले वित्त वर्ष के इसी तिमाही के मुकाबले 68 फीसदी का उछाल हुआ। तीसरी तिमाही में कंपनी ने 148 करोड़ रुपये की बिक्री की थी, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को 88 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी।
हालांकि, कंपनी के मुनाफे में तेजी दूर-दूर तक नहीं दिखी। उल्टे कंपनी का शुध्द मुनाफा 88 फीसदी गिरकर महज दो करोड़ रुपये रह गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी का शुध्द लाभ 19 करोड़ रुपये का था। दूसरी तरफ, कंपनी के शेयरों की कीमत में भी काफी गिरावट देखने को मिली है।
एक जनवरी, 2009 को कंपनी के एक शेयर की कीमत 108.35 रुपये थी, लेकिन मंगलवार को इसकी कीमत कम होकर 48.75 रुपये रह गई थी। मतलब पूरे 55 फीसदी की गिरावट। पिछले साल मार्च तक कंपनी के सिर पर 229.79 करोड़ रुपये का कर्ज था, जबकि उसकी कुल बिक्री 254.46 करोड़ रुपये की थी।
चोगले का कहना है, ‘हमें उम्मीद है कि इस रणनीति को लागू करने बाद हम अपने मुनाफे को दूसरी तिमाही के स्तर तक ले जाएंगे।’ चोगले अब कंपनी के कारोबार में विस्तार करना चाहते हैं। इसके लिए वह कर्ज और इक्विटी का सहारा लेकर पैसे उगाहने की योजना बना रहे हैं।
पुनर्संचना और ग्राहकों को ज्यादा सामान देने के अलावा कंपनी रणनीति के तीसरे हिस्से में अपने विस्तार की योजना पर फिर से विचार करने वाली है। चोगले ने बताया कि, ‘हम अधिग्रहण की अपनी कोशिशों को या तो रोक दिया है या फिर उनके बारे में फिर से बात कर रहे हैं।’

First Published - March 5, 2009 | 1:34 PM IST

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