रियल एस्टेट

रीपो रेट में कटौती से लौट सकती है रियल एस्टेट में मांग, सुस्त पड़े मार्केट में फिर से हलचल संभव

दर में कटौती ऐसे समय में हुई है, जब भारत के शहरों में मकानों की बिक्री कम हुई है। इसमें खरीदने की क्षमता कम होना एक बड़ा कारण है

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प्राची पिसल   
Last Updated- December 05, 2025 | 10:58 PM IST

आवास क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि रीपो दर में कटौती करने से मांग में सुधार की उम्मीद है। इससे ग्राहकों की खरीद शक्ति बढ़ेगी और दूर बैठे खरीदारों को बाजार की ओर आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

एनारॉक ग्रुप के चेयरपर्सन अनुज पुरी का कहना है कि आवास ऋण पर औसत ब्याज दरें (रीपो से जुड़ी) भारत में 7.9 प्रतिशत सालाना हैं। एक बार जब बैंक ताजा कटौती का लाभ ग्राहकों को दे देंगे तो दरें करीब 7.65 प्रतिशत सालाना रह जाएंगी। यह अहम कारक है जिससे मकान खरीदार आकर्षित हो सकते हैं।

जेएलएल इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री और रिसर्च ऐंड आरईआईएस के प्रमुख डॉ. सामंतक दास ने कहा, ‘यह कदम क्रय शक्ति बढ़ाने में उत्प्रेरक का काम करेगा। खासकर किफायती और मझोले बाजार में मकान खरीदने के नए और इच्छुक खरीदार सक्रिय में बदल सकते हैं।’

दर में कटौती ऐसे समय में हुई है, जब भारत के शहरों में मकानों की बिक्री कम हुई है। इसमें खरीदने की क्षमता कम होना एक बड़ा कारण है। एनारॉक रिसर्च के अनुसार 2025 के पहले 9 महीनों के दौरान शीर्ष 7 भारतीय शहरों में आवास की बिक्री पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 20 प्रतिशत गिर गई।

पुरी ने कहा, ‘देश में किफायती और मझोले खंड के मकानों की मांग मजबूत बनी हुई है। लेकिन ज्यादा दाम के कारण लोगों की खरीदने की क्षमता नहीं है। दर में कटौती से दूर बैठे खरीदार बाजार में आ सकते हैं।’ इस साल मकानों की कीमत 10 प्रतिशत बढ़ी है। किफायती आवास क्षेत्र जूझ रहा है। एनारॉक के अनुसार कुल बिक्री में किफायती आवासों की बिक्री की हिस्सेदारी 2019 में 38 प्रतिशत से घटकर  2025 के शुरुआती 9 महीनों में 18 प्रतिशत रह गई। आपूर्ति भी 40 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत रह गई।

 नाइट फ्रैंक इंडिया और नारेडको की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के 8 बड़े शहरों में किफायती आवासों के लिए आपूर्ति और मांग का अनुपात 2019 में 1.05 से घटकर 2025 की पहली छमाही में 0.36 रह गया जो इस खंड में गंभीर रूप से कम आपूर्ति का संकेत है।

जेएलएल के दास का कहना है कि किफायती और मध्यम खंड के आवास में कीमतों को लेकर प्रतिरोध है, जिससे 2025 में आवास बिक्री पिछले साल की तुलना में 8 से 9 प्रतिशत घट सकती है।

नाइट फ्रैंक इंडिया में इंटरनैशनल पार्टनर, चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, ‘ऋण की लागत में कमी से रियल एस्टेट क्षेत्र को समय पर राहत मिली है। आवास ऋण की दर कम होने से अंतिम उपभोक्ता को बनाए रखने और डेवलपरों की लागत संरचना में सुधार में मदद मिल सकती है। हमें उम्मीद है कि इससे किफायती और मध्यम कीमत वाले आवासों की बिक्री को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी, जिसमें पिछली कुछ तिमाहियों में क्रमिक गिरावट देखी जा रही है।’

बैंक बाजार के मुख्य कार्याधिकारी और सह संस्थापक आधिल शेट्टी ने कहा कि आवास ऋण लेने वालों को मामूली लेकिन अर्थपूर्ण राहत मिलेगी। 20 साल से ज्यादा समय के लिए 50 लाख रुपये तक कर्ज की दरें (अब तक 125 आधार अंक) घटने से पूरे समय के दौरान ईएमआई में करीब 9 लाख रुपये की कमी आएगी।

First Published : December 5, 2025 | 10:31 PM IST