सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी अदार पूनावाला समर्थित माइक्रोफाइनेंस स्टार्टअप स्वस्ति माइक्रोफाइनैंस आगामी वित्त वर्ष में 150 करोड़ रुपये जुटाने को लेकर बातचीत कर रही है। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी साझा की है। स्वस्ति के सह-संस्थापक अरुण कुमार पद्मनाभन ने कहा, इसके वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में होने की संभावना है।
उन्होंने बताया, बिना किसी गारंटी के दिए जाने वाले कोलेट्ररल मुफ्त कर्ज के जरिये महिला उद्यमियों को समर्थन देने वाली कंपनी इस दौर के लिए भारतीय एवं विदेशी, दोनों तरह के निवेशकोंं के साथ बातचीत कर रही है। आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त कंपनी ने कुछ समय पहले ही अपने हालिया निवेशकों, पूनावाला, नॉर्डिक माइक्रोफाइनैंस इनीशिएटिव तथा राजीव डडलानी समूह से 31 करोड़ रुपये जुटाए थे।
पद्मनाभन ने कहा, ‘इस वित्तीय राशि से हमारी योजना मार्च 2022 तक अपनी शाखाओं की संख्या दोगुनी करके 150 करने तथा पोर्टफोलियो को दोगुना करके 800 करोड़ रुपये करने की है।’
पद्मनाभन ने नारायण सुब्रमण्यम के साथ मिलकर साल 2010 में कंपनी की स्थापना की थी। कंपनी वित्त वर्ष 2022 में अपने कर्मियों की संख्या भी 800 से बढ़ाकर 1,600 करने की योजना पर काम कर रही है और अपना पोर्टफोलियो बढ़ाने के लिए राजस्थान एवं तमिलनाडु जैसे नए राज्यों में अपने कदम रख रही है।
स्वस्ति मॉडल में एक दूसरे को जानने-पहचानने वाली महिलाएं पांच-पांच के समूह में आती हैं और एक दूसरे के लिए गारंटी देने का काम करती हैं। पद्मनाभन कहते हैं, ‘इसलिए, अगर उनमें से कोई एक आर्थिक परेशानी में होगा तो दूसरे सदस्य उनकी ईएमआई में मदद कर सकते हैं। इसलिए, यह एक सामूहिक गारंटी वाला कारोबार है।’
स्वस्ति का महामारी के बाद संग्रह दक्षता अब 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है और इस वित्त वर्ष के अंत तक इसके संग्रह एवं संवितरण, दोनों मामलों में महामारी से पहले के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि एक बड़ी चुनौती यह है कि कंपनी जिन ग्राहकों के साथ कारोबार कर रही है, वे कम आय वाली महिलाएं हैं जो वेंडर, दर्जी, दुकानदार जैसे छोटे कारोबार करती हैं और डिजिटल लेनदेन की अधिक समझ न होने के चलते नगदी में लेन-देन करने को वरीयता देती हैं।