बीएस बातचीत
भारतपे के सह-संस्थापक और एमडी अशनीर ग्रोवर ने विवादों में फंसने और कंपनी के धन में हेराफेरी के आरोप के बाद 28 फरवरी को पद से इस्तीफा दे दिया था। हालिया विवाद के बीच भारतपे के बोर्ड के चेयरमैन रजनीश कुमार से तमाल बंद्योपाध्याय ने कंपनी की मौजूदा और भावी रणनीति के बारे में बात की। पेश है संक्षिप्त अंश:
ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनी मामलों का मंत्रालय अशनीर मामले में भारतपे के बोर्ड के व्यवहार की जांच कर रहा है। बोर्ड में क्या गलत हुआ?
आप मीडिया की खबरों के आधार पर मुझसे सवाल कर रहे हैं। कंपनी को मंत्रालय से इस बारे में अभी तक कोई संदेश या समाचार नहीं मिला है। यह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। बोर्ड में शेयरधारक या उनके नामित जैसे कि अशनीर (इस्तीफा दे चुके हैं), शाश्वत नकरानी, सिकोया कैपिटल के हर्षजीत सेठी आदि शामिल हैं। अक्टूबर 2021 में गैर-कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर मेरे शामिल होने से पहले बोर्ड में सिर्फ एक पेशेवर गैर-कार्यकारी निदेशक केवल हांडा थे। बोर्ड की कार्रवाई और निर्णय की रिकॉर्डिंग की गई है और कोई भी एजेंसी इसे देख सकती है। इसमें छिपाने जैसी कोई बात नहीं है।
आपने भारतपे ही क्यों जॉइन किया?
यह सच है कि कई कंपनियों ने मुझे अपने बोर्ड में लेने के लिए संपर्क किया था। मैं बोर्ड का निदेशक बनने का प्रस्ताव बहुत देखभाल कर ही कबूल करता हूं और भारतपे के अलावा मैंने बेहद प्रतिष्ठित कंपनियों जैसे एचएसबीसी एशिया पैसिफिक, लार्सन ऐंड टुब्रो इन्फोटेक और हीरो मोटोकॉर्प के बोर्ड में शामिल होने का प्रस्ताव स्वीकार किया है। नवोन्मेष और भारत के नए युग की अर्थव्यवस्था में योगदान को देखते हुए स्टार्टअप और फिनटेक के प्रति मेरा हमेशा से ही आकर्षण रहा है। भारतपे सफलतम फिनटेक कंपनियों में से एक है।
हालिया विवादों के मद्देनजर आपको इसके बोर्ड में शामिल होने पर पछतावा हुआ होगा?
जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह की कठिन परिस्थितियों को संभालना मेरे लिए नया नहीं है। कंपनी में शामिल होने को लेकर कोई पछतावा नहीं है और हम इसे स्टार्टअप के लिए आदर्श बनाने का हरसंभव प्रयास करेंगे।
अशनीर और उनकी पत्नी अब कंपनी में नहीं हैं। लेकिन उन्होंने बोर्ड पर षड्यंत्र रचने तथा पुरुषवादी होने का आरोप लगाया है…
मैं किसी के आरोप पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। मैं इतना ही कहूंगा हूं कि शार्दूल अमरचंद मंगलदास ऐंड कंपनी जैसी प्रतिष्ठित फर्म द्वारा कारोबारी संचालन की समीक्षा की गई है, जिसमें अलवारेज ऐंड मार्शल तथा प्राइसवाटरहाउस कूपर्स ने सहयोग किया है। क्या आप कहना चाहते हैं कि ये फर्में अपनी साख दांव पर लगाकर किसी षड्यंत्र में शामिल होंगी।
भारतपे टेक कंपनी है। आईटी टीम और उसके लीडर के योगदान के बारे में बताएं?
जहां तक कंपनी के भविष्य की बात है तो बोर्ड और प्रबंधन अगले 18 से 24 महीने में कंपनी को सूचीबद्घ कराने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी को व्यक्ति संचालित निजी फर्म से बोर्ड संचालित सूचीबद्घ बनाने की योजना को सही तरीके से अंजाम दिया जाएगा।
अशनीर के कंपनी से निकलने के बाद भारतपे का भविष्य क्या है क्योंकि निर्णय के पीछे उनका हाथ होता था?
किसी संगठन को खड़ा करने में लीडर की भूमिका से कभी इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन संगठन को सफल बनाने में टीमवर्क का हमेशा योगदान होता है। हम टीम के अन्य सदस्यों के योगदान को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
अशनीर की 9.5 फीसदी (या 8.5 फीसदी) हिस्सेदारी का क्या होगा? क्या मौजूदा निवेशक उनके हिस्से को खरीदेंगे?
इस मसले का समाधान शेयरधारक समझौते के तहत होगा। नई पूंजी जुटाने के दौरान मौजूदा निवेशकों की सहमति से द्वितीयक शेयर बिक्री की अनुमति है। मौजूदा शेयरधारकों के अशनीर का हिस्सा खरीदने की किसी योजना के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
क्या निदेशक मंडल अपने एजेंडे में एकजुट है? निवेशकों की क्या राय है, कहीं वे विभाजित तो नहीं?
कंपनी सूचीबद्ध होने की एक निश्चित समयावधि को ध्यान में रखते हुए वृद्धि की राह में आगे बढ़ रही है। निदेशक मंडल भी पूरी तरह से एकमत और प्रतिबद्ध हैं ताकि पहले से ही सूचीबद्ध कंपनियों के वांछित मानक को पूरा कर लिया जाए भले ही यह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है और इसमें कोई सार्वजनिक पूंजी शामिल नहीं है। सलाहकार भी प्रशासन से जुड़ी समीक्षा रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रहे हैं। यह एक व्यापक प्रक्रिया है और ब्लूप्रिंट एक हफ्ते में तैयार होगा। मुझे नहीं पता आपको निवेशकों की राय अलग होने की जानकारी कहां से मिली। सभी फैसले निवेशकों और निदेशक मंडल द्वारा एकमत से लिए जाते हैं।
ऐसी रिपोर्ट है कि अशनीर के पास पूरी हिस्सेदारी नहीं है जिसका वह दावा करते हैं। इसके मूल संस्थापक भाविक कोलाडिया की हिस्सेदारी 9 फीसदी का ही हिस्सा है। अशनीर, सह-संस्थापक नकरानी और कोलाडिया कंपनी में कितनी हिस्सेदारी रखते हैं?
मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि ये रिपोर्ट कहां से आती हैं।
आप भारतपे में कॉरपोरेट प्रशासन में सुधार के लिए कैसे कदम उठाने की योजना बना रहे हैं? आखिर इसमें क्या गड़बड़ी हुई और इसके लिए आप किसको जिम्मेदार ठहराते हैं?
मैंने हमेशा कहा है कि एऐंडएम और पीडब्ल्यूसी जैसी कंपनियां बेहद प्रतिष्ठित और पेशेवर हैं और इनके निष्कर्षों को न मानने की भारतपे के निदेशक मंडल के पास ऐसी कोई वजह नहीं है। कॉरपोरेट प्रशासन संरचना में सुधार की प्रक्रिया में सभी नीतियों, खरीद की समीक्षा और अपडेट शामिल है। इसके अलावा आंतरिक ऑडिट की निगरानी, निदेशकमंडल के आधार को व्यापक बनाना, बोर्ड कमिटी का गठन (भले ही यह निजी कंपनियों के लिए अनिवार्य न हो)और संबंधित पार्टी के लेन-देन में प्रगति हो रही है। मैंने पहले भी देखा है कि जब कारोबार वृद्धि की राह पर होता है तब प्रशासनिक संरचना पर कम ही ध्यान होता है और कई कारोबार अच्छी प्रगति दिखाते हुए आखिरकार असफल हुए हैं। भारतपे भी इस तरह की कंपनियों के बीच कोई अपवाद नहींं है और यह दिक्कत तेजी से वृद्धि कर रही अन्य कंपनियों के साथ भी हो सकती है।
भारतपे, यूनिटी एसएफबी में एक बड़ा निवेशक है। फिनटेक यूनिकॉर्न की इसमें 49 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके मौजूदा हालात का असर यूनिटी एसएफबी पर और नियामक के देखने के तरीके पर भी जरूर पड़ेगा। क्या आपको आरबीआई से कोई संदेश मिला?
भारतपे यूनिटी एसएफबी में एकमात्र निवेशक है। इसने जरूरी निवेश भी किए हैं और यह प्रवर्तक नहीं है। मेरे विचार से कोई नियामकीय चुनौती नहीं है। यह प्रवर्तक और यूनिटी एसएफबी के बोर्ड पर निर्भर करता है कि वे नियामकीय प्रारूप और उम्मीदों के अनुरूप बैंक को चलाएं। आप इस बात को लेकर आश्वस्त रहें कि भारतपे और यूनिटी एसएफबी के रिश्ते ठीक होंगे और दोनों ही कंपनियोंं के हिस्सेदारों की वैल्यू की रक्षा की जाएगी और आरबीआई को कोई शिकायत नहींं होगी। हमें अभी तक आरबीआई से कोई संदेश नहीं मिला है।
इस अभियान के पूरा हो जाने पर क्या आप पद छोड़ देंगे? अगर हां तो कब तक का समय आपके पास है?
मैं क्यों इस्तीफा दूंगा? मैं तीन सालों के लिए हूं और यही मेरा कार्यकाल है। अगर जीवन में कोई चुनौती नहीं तो फिर क्या मजा है। मैंने निदेशक मंडल की जिस बैठक की अध्यक्षता की थी उसमें मैंने यह महसूस किया कि कॉरपोरेट प्रशासन ही कंपनी में एक अहम मुद्दा है। मैंने यह स्पष्ट किया है कि प्रशासन से जुड़े मानक वैसे ही होने चाहिए जिसकी उम्मीद एक सूचीबद्ध कंपनी के लिए की जाती है और उसे सभी नियामकीय उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए। मैंने कुछ कदम उठाना शुरू कर दिया है जिससे कुछ लोगों को असंतोष हो सकता है। अब यह एक मिशन बन चुका है और मैं पद छोडऩे से पहले इसे पूरा करने का इरादा रखता हूं। मैं पारदर्शिता और खुलापन में यकीन करता हूं। अगर मुझे कुछ कहना है तब मैं इसे खुलकर कहूंगा।