ओला इलेक्ट्रिक अपनी लीथियम आयन बैटरी को बल देने के लिए सेल विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है। अगर ऐसा होता है तो वह पहली भारतीय विनिर्माता होगी, क्योंकि बैटरी के लिए सभी सेल का इस समय आयात होता है।
शुरुआत में ओला लीथियम आयन बैटरी के लिए सेल का आयात दक्षिण कोरिया से करेगी, जिसका इस्तेमाल उसके जल्द आने वाले ई-स्कूटर मेंं होगा। इन बैटरियों का विनिर्माण कंपनी के बेंगलूरु में प्रस्तावित आगामी एकीकृत संयंत्र में होगा, जहां ई-स्कूटर भी बनेगा।
वैश्विक सेल उत्पादन में दक्षिण कोरिया, चीन और जापान की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत है। सेल बनाने वाली प्रमुख कंपनियों में एलजी केमिकल्स, पैनासोनिक, बीवाईडी, सैमसंग व अन्य शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर बैटरियां भी बनाती हैं।
तमाम कंपनियां लीथियम आयन बैटरियां असेंबल करती हैं, जिनमें स्कूटर बनाने वाली एथर एनर्जी और सुजूकी, तोशिबा और देंत्सू का संयुक्त उपक्रम शामिल हैं। अन्य कंपनियों में एक्साइड, सन मोबिलिटी, एक्सीकॉम और ओकाया प्रमुख हैं।
सेल बनाने के क्षेत्र में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने घोषणा की थी कि वह भारतीय बाजार के लिए खास सेल बनाने के लिए एलजी केमिकल्स के साथ समझौता कर रही है।
भारत में सेल का विनिर्माण सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रमुख हिस्सा है। संभावित सेल विनिर्माताओं को वित्तीय प्रोत्साहन देने के लिए पहले ही उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) की घोषणा की जा चुकी है। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा की उल्लेखनीय बचत होगी और साथ ही इससे बैटरी की कीमत कम होगी।
ओला इलेक्ट्रिक नेतृत्त्व टीम के एक वरिष्ठ सदस्य ने इस फैसले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, ‘हां, हम सेल का उत्पादन करेंगे। बैटरियों का विनिर्माण हमारी प्रस्तावित इन हाउस फैक्टरी में होगा। हमारी योजना एंड-टु-एंड समेकन का है।’
कंपनी संयंत्र स्थापित करने मेंं 2,400 करोड़ रुपये निवेश कर रही है।
पहले चरण में (जून 2021) वह 20 लाख दोपहिया बनाने की क्षमता तैयार करेगी। अगले साल से यह आंकड़ा बढ़ाकर 1 लाख करोड़ किया जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक लीथियम आयन बैटरी का खर्च ई-स्कूट की कुल लागत का 35-40 प्रतिशत होगा और बैटरी में सेल की लागत करीब 70 प्रतिशत होती है।