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अक्टूबर में अमेरिका को भारत का पेट्रोलियम निर्यात 94.5% बढ़ा, बाकी बाजारों में आई गिरावट

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यह वृद्धि ऐसे समय में हुई, जब भारत के प्रमुख रिफाइंड पेट्रोलियम बाजारों नीदरलैंड (-15.7 प्रतिशत), ऑस्ट्रेलिया (-93.1 प्रतिशत) और टोगो (-62.3 प्रतिशत) को निर्यात घटा है

Last Updated- December 07, 2025 | 10:47 PM IST
Petrol
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अक्टूबर में अमेरिका को भारत का पेट्रोलियम निर्यात 94.5 प्रतिशत बढ़कर 25.15 करोड़ डॉलर हो गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई, जब भारत के प्रमुख रिफाइंड पेट्रोलियम बाजारों नीदरलैंड (-15.7 प्रतिशत), ऑस्ट्रेलिया (-93.1 प्रतिशत) और टोगो (-62.3 प्रतिशत) को निर्यात घटा है।

अमेरिका लंबे समय से भारत के पेट्रोलियम उत्पाद का प्रमुख खरीदार रहा है। वित्त वर्ष 2024 में भारत के पेट्रोलियम निर्यात का 6.9 प्रतिशत (5.8 अरब डॉलर) हिस्सा अमेरिका ने खरीदा। अक्टूबर में भारत के कुल पेट्रोलियम निर्यात में अमेरिका ने 6.4 प्रतिशत खरीदा है। 

वाणिज्य विभाग द्वारा जारी किए गए अलग-अलग आंकड़ों से पता चला है कि अक्टूबर में अमेरिका को होने वाले रत्न और आभूषण के निर्यात पर सबसे विपरीत असर पड़ा है। मोती व जवाहरात के निर्यात में इस महीने के  दौरान 77.3 प्रतिशत कमी आई, जबकि सोने और अन्य कीमती धातु के आभूषणों का निर्यात 51.2 प्रतिशत गिर गया। 

अन्य श्रेणियों में सूती कपड़े और मेडअप (-28.3 प्रतिशत), समुद्री उत्पाद (-22.5 प्रतिशत), डेरी के लिए औद्योगिक मशीनरी (-28.1 प्रतिशत), रेडीमेड गारमेंट्स (-19.6 प्रतिशत), ड्रग फॉर्मुलेशन (-7.5 प्रतिशत) और वाहनों के कल पुर्जे (-18.9 प्रतिशत) का निर्यात भी अमेरिका को काफी कम हो गया।

 रूस से भारत में कच्चे तेल के आयात को रोकने का दबाव बनाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस साल जनवरी में पदभार संभालने के बाद भारत पर दबाव बढ़ाया। 7 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया, जो 27 अगस्त से प्रभावी है। इससे भारत पर कुल अमेरिकी शुल्क दोगुना होकर 50 प्रतिशत हो गया, जिसके कारण अमेरिका को भारत के शिपमेंट में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

अक्टूबर में अमेरिका को भारत का निर्यात 8.6 प्रतिशत गिरकर 6.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि आयात 13.9 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब डॉलर हो गया, जिससे महीने के दौरान 1.8 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष रहा।  

अमेरिका ने यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के एक नए प्रयास के तहत अक्टूबर में रूस के सबसे बड़े तेल उत्पादकों  रोसनेफ्ट और लुकऑयल  पर प्रतिबंध लगा दिए। इसकी वजह से भारत की निजी व सरकारी रिफाइनरियों की रूस से कच्चे तेल की खरीद में काफी कमी आई। 

भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संवाददाताओं से कहा है कि देश अमेरिका से अपनी वार्षिक ऊर्जा आयात को वर्तमान में 12 से 13 अरब डॉलर से दोगुना कर सकता है। अक्टूबर में अमेरिका से भारत का कच्चे तेल का आयात 18.3 प्रतिशत बढ़कर 49.6 करोड़ डॉलर हो गया।

डिप्टी यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (यूएसटीआर) रिक स्विट्जर के नेतृत्व में एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह के अंत में भारत का दौरा करने वाला है। यह दौरा ऐसे समय में  हो रहा है, जब भारत ने कैलेंडर वर्ष के अंत से पहले द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण पूरा करने का लक्ष्य रखा है। 

प्रस्तावित व्यापार समझौते के सहायक यूएसटीआर और मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच और यूएसटीआर के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस समझौते की प्रगति का जायजा लेने के लिए भारत आने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे।  सितंबर में डिप्टी यूएसटीआर नियुक्त हुए स्विट्जर नई दिल्ली की अपनी पहली यात्रा करेंगे।

अमेरिका के साथ व्यापार पर दो समानांतर बातचीत चल रही है। इसमें एक वार्ता व्यापक समझौते पर है, जिसमें वक्त लगेगा, जबकि एक वार्ता 50 प्रतिशत शुल्क के बोझ से जुड़ा हुआ है। 

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First Published - December 7, 2025 | 10:47 PM IST

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