देश में चीनी का उत्पादन पिछले साल की अपेक्षा करीब 18 फीसदी अधिक हुआ है। चीनी उत्पादन बढ़ने के साथ गन्ने के भुगतान का बकाया भी बढ़ता जा रहा है। चीनी उद्योग को उम्मीद थी कि बजट में चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) और एथेनॉल की कीमत बढ़ाए जाने से का ऐलान होगा लेकिन ऐसा नहीं होने से चीनी उद्योग से जुड़े लोग मायूस हुए हैं।
चीनी उद्योग लंबे समय से मांग कर रहा है कि केंद्र सरकार चीनी की MSP 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर कम से कम 42 रुपये करे। बजट में इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। एथेनॉल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी किये जाने की मांग पर भी बजट में कुछ नहीं कहा गया।
महाराष्ट्र के पूर्व चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने कहा कि पिछले पांच सालों में, कोऑपरेटिव और प्राइवेट चीनी मिलों ने उधार लेकर चीनी और एथेनॉल परियोजनाओं में बड़ी मात्रा में निवेश किया है। उस निवेश की भरपाई के लिए केंद्रीय बजट से उम्मीद थी। लेकिन, बजट में चीनी और एथेनॉल के लिए कोई प्रोविजन न होने से इंडस्ट्री निराश हुई है।
Also Read: बजट में ग्रोथ को गति देने को निवेश पर जोर, घाटे का लक्ष्य बताता है सरकार की प्राथमिकता: सीतारमण
वेस्ट शुगर मिल्स एसोसिएशन (विस्मा) के अध्यक्ष बी. बी. ठोंबरे ने कहा कि यूनियन बजट पूरी तरह से शहरी नागरिकों और एंटरप्रेन्योर्स के लिए है। किसानों की आय बढ़ाने के ऐलान के अलावा इसमें कोई ठोस फाइनेंशियल प्रावधान नहीं है। गन्ना किसानों, शुगर इंडस्ट्री, ऑयल इंडस्ट्री, एग्रो-प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए कोई खास प्रावधान नहीं है। इसलिए, ऐसा लगता है कि बजट सिर्फ शहरी लोगों और इंडस्ट्री के लिए है।
भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के मुताबिक 31 जनवरी 2026 तक पूरे भारत में चीनी का उत्पादन 195.03 लाख टन तक पहुंच गया है, जबकि पिछले सीजन की इसी अवधि में यह 164.79 लाख टन था। वर्तमान में देश भर में 515 चीनी मिलें चालू हैं, जबकि पिछले साल देश में इस समय 501 मिलें चल रही थी।
महाराष्ट्र में इस सीजन में ज्यादा पेराई हुई है, चीनी उत्पादन 78.72 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की सामान्य अवधि की तुलना में लगभग 42 फीसदी ज्यादा है। राज्य में वर्तमान में 206 मिलें चालू है, जबकि पिछले साल इसी समय 190 मिलें चालू थीं। उत्तर प्रदेश ने अब तक 55.1 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कर्नाटक में 38.1 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जो पिछले सीजन की इसी अवधि की तुलना में करीब 15 फीसदी अधिक है।
इस्मा के डीजी बल्लानी ने कहा कि, गन्ने के भुगतान का बकाया बढ़ रहा है। जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ रहा है और चीनी का स्टॉक बढ़ता जा रहा है, संकेत मिल रहे हैं कि गन्ने के भुगतान का बकाया ऊपर की ओर ट्रेंड दिखा रहा है।
उद्योग चीनी उत्पादन लागत और चीनी की बिक्री से होने वाली कमाई के बीच बेमेल होने के कारण ऑपरेशनल और कैश-फ्लो दबाव का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत के हिसाब से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में जल्द बदलाव करना, इस सेक्टर की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने, किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान करने और सरकार पर बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के कुल मिलाकर बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होगा