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‘खर्च से परहेज नहीं करते सभी उपभोक्ता’

Last Updated- December 15, 2022 | 7:52 AM IST

बीएस बातचीत
हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) लॉकडाउन के कारण पैदा हुए व्यवधान के बाद अपने परिचालन को धीरे-धीरे लेकिन लगातार सुचारु कर रही है। एचयूएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजीव मेहता ने विवेट सुजन पिंटो से बातचीत में कहा कि अप्रैल से जून मोटे तौर पर परिचालन को बहाल करने की अवधि रही। एचयूएल अब कोविड पूर्व के स्तर के मुकाबले 90 से 100 फीसदी क्षमता उपयोगिता पर परिचालन कर रही है जबकि कंपनी अभी भी आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन पर अधिक ध्यान दे रही है। पेश हैं मुख्य अंश:

एफएमसीजी बाजार में सुधार कब दिखेगा? क्या सितंबर तिमाही तक उपभोक्ताओं के वर्ताव में बदलाव दिखेगा?
सितंबर तिमाही में हमें मांग अच्छी दिखेगी। जून तिमाही में आपूर्ति संबंधी बाधाएं दिखी थीं। उस दौरान आपूर्ति शृंखला सिकुड़ गई थी। मार्च के अंत में उत्पादन ठप हो जाने के बाद जून तिमाही के दौरान हमने उत्पादन में तेजी लाई। उस दौरान आवश्यक वस्तुओं और पेंट्री लोडिंग पर जोर दिया जा रहा था। मैं समझता हूं कि अब हम मांग का अच्छा आकलन कर सकते हैं और इसलिए सितंबर तिमाही में अर्थव्यवस्था की अच्छी समझ होनी चाहिए।

तमाम कंपनियों ने ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों से बिक्री में तेजी की ओर इशारा किया है। इस पर आप क्या कहेंगे?
आपको याद रखना होगा कि ग्रामीण बाजारों में कोविड वैश्विक महामारी के शुरू होने से काफी पहले से नरमी दिख रही थी। उन्हें आपूर्ति संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीण क्षेत्रों में अब बढऩे वाली अधिकतर आपूर्ति मुख्य तौर पर उसी पाइपलाइन को भर रही है जहां पहले कमी दिख रही थी। इसलिए मैं उस निष्कर्ष पर नहीं जाउंगा।

डाउनट्रेडिंग के बारे में आप क्या कहेंगे जबकि खर्च के मोर्चे पर उपभोक्ता पहले से ही काफी सतर्क हैं?
जब कभी कठिन समय आता है, उपभोक्ता छोटे पैक की ओर रुख करते हैं और कीमत पर अधिक ध्यान देते हैं। मूल बात यह है कि ऐसे समय में उपभोक्ताओं का जोर मूल्य पर होता है। यही कारण है कि वे उन उत्पादों और पैकेट आकार की तलाश करते हैं जो किफायती तरीके से उनकी खपत संबंधी जरूरतों को पूरा करे। इसलिए विभिन्न आकार के पैकेट की जरूरत होती है क्योंकि एक ही आकार से उनकी जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता है।

क्या आप प्रीमियम एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे जबकि जोर आवश्यक वस्तुओं पर दिया जा रहा है और विवेकाधीन खर्च में नरमी दिख रही है?
कई लोगों के लिए एफएमसीजी उनकी खरीदारी का एक छोटा हिस्सा है। इस प्रकार के लोग अपने विवेकाधीन खर्च से परहेज नहीं कर सकते हैं। जबकि कुछ लोग अपने उत्पादों से अधिक फायदा उठाना चाहते हैं लेकिन वे छोटे पैक का विकल्प तलाशते हैं अथवा कीमत के मोर्चे पर वे काफी किफायत बरतते हैं।

क्या आप कीमत में वृद्धि की गुंजाइश न होने से मात्रात्मक बिक्री बढ़ाने पर जोर देंगे?
मात्रात्मक बिक्री में वृद्धि हमारे लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। इससे सुनिश्चित होता है कि हमारे पास बाजार हिस्सेदारी है।

First Published - June 27, 2020 | 1:04 AM IST

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