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Byju’s अल्फा से गायब करोड़ों! नई याचिका में रवींद्रन पर गंभीर आरोप

डेलावेयर की अदालत में दाखिल नई याचिका में दावा किया गया है कि बैजूस अल्फा के गायब 53.3 करोड़ डॉलर कथित रूप से राउंड-ट्रिप होकर संस्थापक बैजू रवींद्रन तक पहुंच गए।

Last Updated- November 18, 2025 | 6:39 AM IST
Byju's
Representative Image

Byju’s अल्फा के लेखा से गायब हुए 53.3 करोड़ डॉलर का बड़ा हिस्सा इसके संस्थापक बैजू रवींद्रन और उनके सहयोगियों के पास ही दूसरे तरीके (राउंड ट्रिप्ड) से वापस आ गए। डेलावेयर दिवालिया अदालत में हाल ही में दायर की गई याचिका में यह आरोप लगाया गया है। यह आरोप पहले दायर किए गए शपथ पत्र के अनुरूप नहीं है, जिसमें कहा गया था कि इस रकम का उपयोग वैध कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया गया था।

वादी और देनदार बैजू अल्फा के साथ-साथ हस्तक्षेपकर्ता वादी ग्लास ट्रस्ट कंपनी द्वारा अदालत में दायर की गई याचिका में लगाया गया आरोप ब्रिटेन की खरीद फर्म ओसीआई लिमिटेड के साथ एक समझौते से जुड़ा है, जिसने कथित रूप से विवादित धनराशि का बड़ा हिस्सा प्राप्त किया था।

डेलावेयर की विशेष प्रयोजन के लिए कर्ज देने वाली कंपनी बैजूस अल्फा ने टर्म लोन बी प्राप्त किया था और अब ऋणदाताओं द्वारा इसका नियंत्रण किया जाता है। इसने 53.3 करोड़ डॉलर की वसूली के प्रयासों के तहत ओसीआई लिमिटेड और डेलावेयर में उसके पूर्व प्रतिनिधि रूपिन बैंकर पर मुकदमा किया है।

समझौते के हिस्से के रूप में ओसीआई के संस्थापक ओलिवर चैपमैन ने शपथ पत्र दायर किया है कि फाइलिंग में एक-एक पाई का हिसाब दिया गया है और बताया गया है कि ओसीआई को अल्फा से रकम मिलने के बाद उसका क्या किया गया। फाइलिंग में आरोप लगाया गया है कि चैपमैन की समीक्षा से पता चलता है कि रकम (अलग-अलग हस्तांतरण के जरिये) सिंगापुर के एक कॉरपोरेट साधन को भेजा गया था, जिसकी पहचान कागजों में बैजूस ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के तौर पर की गई है। इसके बारें में कहा जाता है कि इसका स्वामित्व भी रवींद्रन के पास है।

दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि चैपमैन की घोषणा से पता चलता है कि बैजू रवींद्रन करोड़ों डॉलर की कॉरपोरेट परिसंपत्ति को निजी इस्तेमाल के वास्ते हड़पने के लिए साजिश कर रहा था।

अदालत में दाखिल की गई याचिका के मुताबिक, ‘लेखा में गायब हुए 53.3 करोड़ डॉलर के अल्फा फंड्स का सच लंबे अरसे से एक रहस्य बना है। मगर देनदार के साथ अपने समझौते के तहत उस रकम के अधिकांश हिस्से का मध्यस्थ हस्तांतरणकर्ता ओसीआई आगे आने के लिए तैयार है। अल्फा फंड्स के अधिकांश हिस्से की सच्चाई यही है कि वे बैजू रवींद्रन और उनके सहयोगियों को वापस भेज दिए गए थे।’ याचिका की एक प्रति बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी देखी है। इसमें कहा गया है, ‘महीनों तक, बैजूस एंटरप्राइज, जिसमें सीधे तौर पर इसके संस्थापक के माध्यम से भी शामिल था ने शेयरधारकों, ऋणदाताओं और मीडिया को बताया कि अल्फा फंड्स उसके पास है।’

उल्लेखनीय है कि बैजूस की मूल कंपनी थिंक ऐंड लर्न के संस्थापकों ने आरोपों का पूरी तरह खंडन किया है और इसे निराधार बताया है। सोमवार को कंपनी ने कहा कि वे डेलावेयर कार्यवाही में जीएलएएस ट्रस्ट की नवीनतम फाइलिंग में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं।

First Published - November 18, 2025 | 6:39 AM IST

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