कारोबारियों को नियमों का पालन करने में आसानी हो, इसके लिए कंपनी मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने केवाईसी नियम में ढील दी है। अब कंपनी के निदेशकों को हर साल केवाईसी (अपने बारे में जानकारी) नहीं देनी होगी, बल्कि अब तीन साल में एक बार जानकारी देनी होगी। एक सरकारी अधिसूचना में एमसीए ने कहा है कि अगर निदेशक के फोन नंबर, ईमेल या घर के पते जैसी निजी जानकारी में कोई बदलाव होता है, तब उन्हें 30 दिनों के अंदर इसकी जानकारी देनी होगी।
एमसीए ने 31 दिसंबर, 2025 को अपनी अधिसूचना में कहा, ‘जिस व्यक्ति के पास किसी वित्तीय वर्ष के 31 मार्च तक डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर है, उसे हर तीसरे साल 30 जून तक केंद्र सरकार को फॉर्म नंबर डीआईआर-3 केवाईसी वेब में केवाईसी की जानकारी देनी होगी। यानी अब हर साल केवाईसी नहीं देनी होगी।’
किंग स्टब ऐंड कासिवा, एडवोकेट्स ऐंड अटॉर्नीज के पार्टनर सिद्धार्थ करनानी ने कहा, ‘यह एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है जिसमें जोखिम को ध्यान में रखकर नियमों में बदलाव किया गया है। इससे ग्राहकों और नियमों के दायरे में आने वाली कंपनियों, दोनों पर नियमों का बोझ कम होगा। खासकर उन मामलों में जहां ग्राहकों की जानकारी और लेन-देन का तरीका एक जैसा रहता है और इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को वित्तीय मदद देने जैसे मुख्य उद्देश्यों को नरम नहीं किया गया है।’
एमसीए ने एक बयान में कहा कि ये बदलाव गैर-वित्तीय नियामकीय सुधारों पर बनी उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों और संबंधित मंत्रालयों के साथ सलाह-मशविरा करके हितधारकों से मिले सुझावों के आधार पर किए गए हैं। एमसीए ने कहा, ‘इस बदलाव का मकसद सभी कंपनियों के निदेशकों को नियमों का पालन करने में सहूलियत देना है।’
एमसीए ने कंपनी अधिनियम की धारा 248(2) के तहत सी-पेस के माध्यम से रजिस्ट्रार के पास सरकारी कंपनियों को बंद करने के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया को भी आसान बना दिया है। इस संशोधन में यह प्रावधान है कि ऐसे मामलों में, केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त या नामांकित एक या अधिक निदेशकों के संबंध में क्षतिपूर्ति बॉन्ड कंपनी की ओर से एक अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा दिया जाएगा जो अवर सचिव के पद से नीचे नहीं होगा।