बीएस बातचीत
30 सितंबर को केरल के धनलक्ष्मी बैंक के शेयरधारकों ने बैंक के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्याधिकारी सुनील गुरबक्सानी के खिलाफ मतदान किया, जिन्हें फरवरी 2020 से तीन साल के लिए नियुक्त किया गया था। टी ई नरसिम्हन को दिए साक्षात्कार में उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से बातचीत की और बताया कि गवर्नेंस के विभिन्न मसले उठाने के बाद किस तरह से निदेशकों ने उन पर पद छोडऩे का दबाव बनाया। मुख्य अंश…
एजीएम के परिणाम पर आप किस तरह की प्रतिक्रिया देंगे?
मुझे आश्चर्य नहीं हुआ क्योंंकि दो निदेशकों की तरफ से व्यक्तिगत तौर पर हमें धमकाया गया था। उन्होंने कहा था, चूंकि मैं उनके मित्रों के पंख कतरने की कोशिश कर रहा हूं, जो बैंक के साथ पिछले 17-18 साल से जुड़े हुए हैं। मैंने उनसे कहा कि यह प्रोफेशनल मामला है। मेरे पूर्ववर्ती ने उन्हें सीमित शक्ति दी थी लेकिन वे असीमित प्रशासन व वित्तीय शक्तियों का इस्तेमाल करते रहे, जो अच्छा गवर्र्नेंस नहीं है। बैंक के पास किसी रिटयर व्यक्ति को सीजीएम कैडर में नियुक्ति की नीति नहीं है। जिन अहम शेयरधारकों ने सात महीने पहले मुझे एमडी व सीईओ के तौर पर चुना था, वे अचानक हमारे खिलाफ हो गए, इसका मतलब यह है कि वे पूरी तरह अपुष्ट खबरों पर भरोसा कर रहे हैं। उन्होंने कभी भी हमसे हमारे खिलाफ आरोपों के बारे में नहीं पूछा। पर्दे के पीछे षडयंत्र रचा गया, जिसकी जांच होनी चाहिए। चूंकि मैंंने गवर्नेंस के गंभीर मामले उठाए थे और मैं उसका शिकार हो गया। हमारी निकासी को एथिक्स व गवर्नेंस के साथ खड़े रहने के नतीजे के तौर पर देखा जाना चाहिए।
आपने कौन से अहम मामले उठाए?
ये मामले लंबे समय से चले आ रहे थे, न कि ये सात महीने पुराने थे जब से मैं वहां था। मेरे पूर्ववर्तियों ने इन समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन कोशिश कारगर नहीं रही। अपने प्रोफेशनल व्यवहार के चलते मैंने इन्हें जारी नहीं रहने दिया। मैंने सबकुछ जून में शुरू किया जब नियामक ने भी बोर्ड मीटिंग में एक ऐसे व्यक्ति की उपस्थिति का संज्ञान लिया, जो बिना निमंत्रण के और बैठक में किसी योगदान के वहां उपस्थित हो रहा था। आरबीआई ने इसे गंभीरता से लिया और उन्हें इस्तीफा देने को कहा। 69 साल की आयु में निदेशक की नियुक्ति इसलिए की गई क्योंकि वह 30-35 साल से पड़ोसी या मित्र है और गवर्नेंस पर बात करता है।
नॉर्थ लॉबी के बारे में क्या अफवाह है?
इस तरह की बात नॉर्थ लॉबी के नाम पर की गई। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। किसी अन्य स्रोत से आ रही रकम पर कोई चर्चा नहीं हुई। पूंजी जुटाने पर चर्चा जरूरत बन गई थी क्योंंकि कोविड महामारी फैल गई थी। बोर्ड ने पूंजी की जरूरत पर सतर्क रुख अपनाया।
बोर्ड के कुछ सदस्यों व यूनिया का आरोप है कि आपने परिचालन से जुड़े जो फैसले लिए, उससे बैंंक मुश्श्किल में आ जाएगा जबकि बोर्ड ऐसा नहींं करने के लिए कह रहा था। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मैंंने उत्तर भारत में नई शाखाएं खोलने पर बात नहीं की बल्कि वास्तव में हम देश भर में लाभ या नुकसान के आधार पर शाखाएं बंद कर रहे थे। इसके अलावा नुकसान वाली 40 शाखाओं में से 15 एक तिमाही में तब लाभ में आ गई जब हमने उन पर विशेष ध्यान दिया। उचित तकनीक और मानवीय पर्यवेक्षण से काफी कुछ किया जा सकता है।
धनलक्ष्मी बैंक की वित्तीय स्थिति कैसी है?
पिछले छह महीने में बैंक के कुछ कारोबारों का प्रदर्शन पिछले छह साल के मुकाबले बेहतर रहे हैं। कुल जमाएं बढ़ी हैं, चालू व बचत खाता दो फीसदी बढ़कर 31 फीसदी हो गया। इसके अलावा गोल्ड लोन बिजनेस पिछले तीन महीने में बढ़ा है। हमने पिछले तीन महीने में जो कुछ किया वह पिछले 12 महीने में किए गए काम से बेहतर था। अगर मुझे पद पर बने रहने की अनुमति मिलती तो मैं बैंंक नई ऊंचाई पर ले जाता और मेरा मानना है कि केरल में अपनी जड़ें कामय रखकर बैंक में बढ़त की क्षमता है।
बैंक की पूंजी की स्थिति कैसी है? क्या आप बढ़त के लिए पूंजी जुटाने की योजना बना रहे थे?
बैंंक अच्छी तरह से पूंजीकृत है और उसमें बढ़त की गुंजाइश है। हमने कोविड के लिए पर्याप्त प्रावधान किया। एजीएम में 300-400 करोड़ रुपये अधिकृत पूंजी जुटाने की मंजूरी मिली। जब भी जरूरत होगी, बैंक पूंजी जुटाने के लिए तैयार होगा।