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जेट फैलाएगी पंख मगर धीरे-धीरे

Last Updated- December 07, 2022 | 6:00 AM IST

भारत की प्रमुख निजी एयरलाइंस में शुमार जेट एयरवेज ने अपनी वैश्विक विस्तार की योजना को अगले वर्ष के अंत तक टाल दिया है।


कंपनी के प्रमुख वाणिज्यिक अधिकारी का कहना है कि विमानन कंपनी ने यह फैसला तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से लिया है। मुंबई से शंघाई होकर सैन फ्रांसिस्को जाने वाली नई उड़ान सेवा शुरू करने के मौके पर सुधीर राघवन (प्रमुख वाणिज्यिक अधिकारी) ने बताया, ‘इस उड़ान के बाद, हमें अधिकार मिल जाने के बाद शायद सिर्फ दुबई के लिए ही उड़ान शुरू करें।’

उन्होंने कहा, ‘इसके बाद हम 2009 के अंत तक जब तक हमें हमारा नया एयरक्राफ्ट नहीं मिल जाता, हम अपने अंतरराष्ट्रीय परिचालन कार्य को और मजबूत बनाएंगे।’ राघवन ने यह भी बताया कि कंपनी इक्विटी राइट्स इश्यू के जरिये पैसे एकत्र करने के बारे में भी सोच रही है, लेकिन इसके लिए ‘अभी सही समय नहीं है’, क्योंकि अभी तेल की कीमतें काफी ऊंची हैं और वैश्विक शेयर बाजारों की हालत काफी कमजोर है।

अप्रैल में जेट के चेयरमैन नरेश गोयल ने कहा था कि कंपनी राइट्स इश्यू लाने के लिए बाजार का मूल्यांकन कर रही है। कंपनी की योजना राइट्स इश्यू के जरिये लगभग 1,600 करोड़ रुपये इकट्ठा करने की है। जेट एयरवेज की योजना कार्गो के कारोबार में भी उतरने की है। राघवन ने कहा कि जेट एयरवेज का इरादा लगभग 40 करोड़ से 60 करोड़ रुपये तक के निवेश से कार्गो सेवाएं देने का भी है, जो उम्मीद है कि 2009 के मध्य या फिर उसके बाद लॉन्च हो जाएगी।

राघवन ने कहा, ‘कंपनी जर्मनी की सबसे बड़ी विमानन कंपनी डॉयचे लुफ्थांसा एजी के साथ संयुक्त उपक्रम के लिए बातचीत कर रही थी, जो सफल नहीं हो पाई।’ एशिया प्रशांत विमानन केन्द्र के अनुसार भारत में फिलहाल 10 से भी कम कार्गो हवाई जहाज हैं और कार्गो विमानन कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं।

राघवन का कहना है कि कार्गो सेवाएं देने वाली अपनी सहायक कंपनी के लिए नए एयरक्राफ्ट का ऑर्डर देने की बजाय, जेट हो सकता है कि अपने कुछ यात्री विमानों को ही माल ढुलाई के काम में लगा दे।जेट एयरवेज और उसकी किफायती दरों वाली विमानन कंपनी जेट लाइट के बेड़े में 108 विमान हैं। अनुमान लगाए जा रहे हैं कि जेट एयरवेज और जेटलाइट जल्द ही मिलकर सेवा प्रदान करेंगे।

राघवन ने बताया कि जेट एयर चाईना, चाईना ईस्टर्न एयरलाइंस और शंघाई एयरलाइंस के साथ कोड शेयरिंग करार के लिए भी बातचीत कर रही है। इसी के साथ एयरलाइन चीन में और नई उड़ाने शुरू करने पर भी विचार कर रही है। राघवन का कहना है कि कंपनी बीजिंग और गुआंगजू के लिए उड़ान सेवाएं देने पर भी विचार कर रही है।

First Published - June 17, 2008 | 12:16 AM IST

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