देश के आईटी उद्योग को विदेशी बाजार में अपनी साख बनाने में काफी समय लगा। लेकिन आने वाली तिमाही में इस उद्योग पर सत्यम मामले की काली परछाई पड़ने की आशंका है।
पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मंदी की मार झेल रही आईटी कं पनियों के लिए इससे अब मुसीबतें और बढ़ सकती हैं। उद्योग का मानना है कि इस मामले के बाद अब ग्राहक कंपनियां और सतर्क हो जाएंगी। हालांकि, सत्यम धोखाधड़ी का पहला मामला है।
बाकी उद्योगों की तरह देश का आईटी उद्योग भी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर काफी हद तक निर्भर है। दरअसल अभी देश की कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक आने में थोड़ा समय लगेगा।
कई आईटी कंपनियों की 60 फीसदी से अधिक कमाई तो अमेरिकी कंपनियों से ही होती है। इसके बाद 20 फीसदी कमाई यूरोप से होती है।
देश की आईटी कंपनियों को काम आउटसोर्स करने से पहले ग्राहक कंपनियां आईटी कंपनी की जांच पड़ताल, कंपनी का आकार और कर्मचारियों की संख्या के अलावा कंपनी ने पहले किस परियोजना पर काम किया है।
किसी भी कंपनी के कामकाज करने के तरीके पर अगर कोई भी संदेह होता है तो उस कंपनी के साथ कोई करार नहीं किया जाता है।उद्योग सूत्रों का कहना है कि अब आईटी उद्योग ने ग्राहक कंपनियों को भरोसा दिलाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।
माइंडट्री के मुख्य वित्त अधिकारी रोस्तो रावणन ने बताया, ‘उद्योग को ग्राहकों के बीच फिर से वहीं भरोसा कायम करने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी। हालांकि कौन सी कंपनी इसके लिए क्या करती है यह तरीका सभी कंपनियों के लिए अलग हो सकता है। हरेक कंपनी को इस हालात से निपटने की तैयारी करनी पड़ेगी।’