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PLI योजना से 4 साल में 3-4 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने और प्राइवेट कंपनियों का निवेश बढ़ने की उम्मीद: ICRA

नवंबर 2023 तक PLI योजना के तहत 1.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ चुका है और 6 लाख 78 हजार से ज्यादा रोजगार पैदा हुए हैं।

Last Updated- June 12, 2024 | 5:09 PM IST
ICRA

PLI योजना से अगले चार सालों में 3-4 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने और 2 लाख नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। सेमीकंडक्टर, सौर ऊर्जा पैनल और दवा निर्माण से जुड़े सामान बनाने वाली कंपनियों को इस योजना से काफी मदद मिलने वाली है।

उम्मीद है कि आने वाले समय में प्राइवेट कंपनियां तेल, गैस, धातु, खनन, अस्पताल, स्वास्थ्य सेवा और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में भी ज्यादा निवेश करेंगी। ये बात ICRA के कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य रेटिंग अधिकारी के रविचंद्रन ने कही है।

उन्होंने आगे कहा, PLI योजना से भले ही 3-4 लाख करोड़ रुपये का निवेश और 2 लाख नौकरियां आने की उम्मीद है, लेकिन प्राइवेट क्षेत्र के निवेश को रिकॉर्ड ऊंचाई पर ले जाने के लिए सरकार को कुछ टैक्स में रियायतें देनी होंगी ताकि लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बच सके।

रविचंद्रन ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में बताया, “PLI योजना के तहत, हम अगले 3-4 वर्षों में 3-4 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की उम्मीद कर रहे हैं। आने वाले समय में, सेमीकंडक्टर, सौर पैनल और दवा बनाने के लिए जरूरी सामान बनाने वाली कंपनियां ऐसे क्षेत्र हैं जहां बड़ी परियोजनाओं के शुरू होने की संभावना है जो पूंजी और रोजगार के लिहाज से काफी फायदेमंद हो सकती हैं। ये विभिन्न क्षेत्रों में 2 लाख नौकरियां पैदा करेंगी।”

PLI योजना की घोषणा 2021 में 14 क्षेत्रों के लिए की गई थी, जिनमें दूरसंचार, घरेलू उपकरण, कपड़ा, चिकित्सा उपकरण निर्माण, ऑटोमोबाइल, विशेष स्टील, खाद्य उत्पाद, उच्च दक्षता वाले सौर पैनल, उन्नत रसायन सेल बैटरी, ड्रोन और दवा शामिल हैं, जिसके लिए कुल 1.97 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

नवंबर 2023 तक PLI योजना के तहत 1.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ चुका है और 6 लाख 78 हजार से ज्यादा रोजगार पैदा हुए हैं।

प्राइवेट क्षेत्र के निवेश (कैपेक्स) के बारे में रविचंद्रन का कहना है कि तेल और गैस, धातु और खनन, अस्पताल, स्वास्थ्य सेवा और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में प्राइवेट निवेश बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की संभावना है। हालांकि, पहले के वर्षों के विपरीत, इस बार निवेश हरित ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ ज्यादा हो रहा है।

उन्होंने कहा, “उच्च स्तर के कैपेक्स तक पहुंचने के लिए हमें मांग पर ध्यान देना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में निचले स्तर के बाजार में खपत कम है। मांग को बढ़ाने के लिए हमें कर छूट या अन्य तरीकों से और प्रयास करने की जरूरत है।”

अनेक उद्योगों में उत्पादन क्षमता का उपयोग पिछले काफी समय से 75 प्रतिशत के आसपास है, जो यह दर्शाता है कि मांग में सुधार प्राइवेट क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। रविचंद्रन का कहना है कि सरकार द्वारा चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में रखे गए 11.11 लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय को बदलने की संभावना नहीं है।

उनका कहना है कि सरकार राजकोषीय सुदृढ़ीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसका मतलब है कि वे सरकारी खर्च घटाकर अर्थव्यवस्था को घाटे से उबारने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राइवेट क्षेत्र को पूंजीगत व्यय बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में निवेश को गति प्रदान करनी होगी।

गौर करने वाली बात यह है कि सरकारी पूंजीगत व्यय आवंटन में भले ही वृद्धि हुई है, उदाहरण के तौर पर 2020-21 में 4.39 लाख करोड़ रुपये से 2024-25 में 11 लाख करोड़ रुपये हो गया है, लेकिन पिछले तीन वर्षों की तुलना में वृद्धि की दर कम हो गई है। (PTI के इनपुट के साथ)

First Published - June 12, 2024 | 4:55 PM IST

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