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नई सहकारी नीति में राष्ट्रीय सहकारी बैंक की सिफारिश, किसानों को सस्ता ऋण देने पर जोर

नई सहकारी नीति से किसानों को मिल सकता है सस्ता ऋण, सरकार ने शीर्ष राष्ट्रीय सहकारी बैंक की सिफारिश की।

Last Updated- July 26, 2025 | 9:29 AM IST
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नई सहकारी नीति ने सस्ता ऋण मुहैया कराने के लिए शीर्ष स्तर का नया राष्ट्रीय सहकारी बैंक बनाने की वकालत की है। इससे विभिन्न स्तर की सहकारी वित्तीय संस्थाओं के बीच सहयोग बेहतर होगा। इसके अलावा प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स), जिला ऋण सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) और राज्य सहकारी बैंकों के तीन स्तरीय ऋण ढांचे को कायम रखा गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यह नीति जारी की, जिसमें कहा गया है, ‘यह (शीर्ष राष्ट्रीय सहकारी बैंक) इन संस्थाओं की क्षमता को निखारने और मदद मुहैया कराने, क्षमता निर्माण करने, विशेषज्ञता प्रदान करने और कारोबारी संभावनाओं के सही उपयोग के लिए है।’ पैक्स पंचायत या ग्राम स्तर पर, डीसीसीबी जिला स्तर पर एवं राज्य सहकारी बैंक राज्य स्तर पर कार्य करते हैं।

नीति में सहकारी समितियों के पंजीकरण की शक्ति का जटिल मुद्दे को नहीं छेड़ा गया है। इसलिए राज्य सहकारी समितियों का पंजीकरण राज्यों और बहु-राज्य सहकारी संस्थाओं का पंजीकरण केंद्र पर छोड़ा गया है।

सहकारी ऋण संस्थाओं (डीसीसीबी, पैक्स, कृषि व ग्रामीण विकास बैंक) के समक्ष आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए नीति में उनके हर पहलू की जांच के वास्ते कार्यबल गठित किए जाने की सलाह भी दी गई है। उनकी चुनौतियां हल करने के उपाय भी सुझाए गए हैं। इस क्रम में दीर्घावधि ऋण और डीसीसीबी आदि में जमा राशि बढ़ाने की योजना पर भी सिफारिश की गई है।

सभी सहकारी बैंक संस्थाओं का नियमन अभी भारतीय रिजर्व बैंक करता है मगर थ्रिफ्ट क्रेडिट सोसायटी जैसी गैर बैंकिंग सहकारी समितियां उसके नियंत्रण में नहीं आतीं। उनके कामकाज पर नजर उस राज्य के सहकारी पंजीयक रखते हैं।

भारत में 8 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं। इनमें करीब दो लाख ऋण सहकारी समितियां और 6 लाख गैर ऋण सहकारी समितियां हैं। गैर-ऋण सहकारी समितियां मुख्य रूप से आवास, डेरी, श्रम और अन्य क्षेत्रों जैसे चीनी, उपभोक्ता, मार्केटिंग, मत्स्य पालन, वस्त्र, सेवाओं, प्रसंस्करण, अस्पतालों आदि में काम करती हैं। सहकारी क्षेत्र में लगभग 30 करोड़ सदस्य हैं, जिनमें पैक्स के ही 13 करोड़ से अधिक सदस्य हैं।

इधर सहकार भारती के संरक्षक डीएन ठाकुर ने कहा कि इस नीति की मंशा स्वागतयोग्य है। यह सहकारिता और सहकारी क्षेत्र के बारे में सरकार के इरादों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

सहकार भारती के संरक्षक ठाकुर ने कहा, ‘इसलिए जो कोई भी अब सहकारी क्षेत्र में काम करना चाहता है, उसके पास नीतिगत ढांचे और समर्थन प्रणाली का स्पष्ट विचार है।’ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राष्ट्रीय सहकारी नीति को किसानों के लिए फायदेमंद बताया है।

First Published - July 26, 2025 | 9:26 AM IST

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