प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
प्रमुख स्टील कंपनियों पर सांठगांठ कर कीमत तय करने का मामला सामने आया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की जांच में पाया गया है कि टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात विनिर्माता सेल ने उत्पादों के दाम तय करने के लिए आपस में मिलीभगत कर इस तरह से समझौते किए जो प्रतिस्पर्धा के खिलाफ हैं। मामले से अवगत सूत्रों ने इसकी जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि प्रतिस्पर्धा आयोग ने जांच रिपोर्ट के नतीजों पर कंपनियों से जवाब मांगा है, साथ ही कंपनियों को वित्तीय ब्योरा भी देने के लिए कहा है।
सूत्रों ने बताया कि प्रतिस्पर्धा आयोग जांच रिपोर्ट का मूल्यांकन कर रहा है और इस मामले में अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। अंतिम आदेश के तहत अगर कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाना है तो उसकी गणना करने के लिए सीसीआई संबंधित कंपनियों से वित्तीय विवरण मांगता है।
एक सूत्र ने कहा, ‘जांच महानिदेशक द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सभी पक्षों की आपत्तियों और सुझाव के लिए सीसीआई एक प्रक्रियात्मक आदेश जारी करता है। आयोग ने अभी तक इस मामले में कोई अंतिम राय नहीं बनाई है।’
इस बारे में पूछे जाने पर जेएसडब्ल्यू स्टील ने कोई टिप्पणी नहीं की। टाटा स्टील और सेल का पक्ष जानने के लिए ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।
सीसीआई 2021 से ही स्टील क्षेत्र में गोलबंदी या सांठगांठ की जांच कर रहा था। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सीसीआई के आदेश का जिक्र करते हुए कहा गया है कि प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच में ‘कंपनियों का व्यवहार भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून के खिलाफ पाया गया है’ और कुछ लोगों को जिम्मेदार भी ठहराया गया है। पिछले साल जनवरी में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा था कि स्टील और सीमेंट उद्योग के ‘सांठगांठ’ देश और इसके बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक बड़ी समस्या हैं।
उन्होंने कहा था, ‘स्टील और सीमेंट उद्योग कुछ ही लोगों के हाथ में हैं। वे हमेशा सांठगांठ कर कीमत तय करते हैं। उनका सांठगांठ देश के लिए एक बड़ी समस्या है।’
भारत दुनिया में स्टील का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और देश के बड़े स्टील उत्पादक कुल उत्पादन का आधे से ज्यादा स्टील उत्पादन करते हैं। बिगमिंट के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में देश में कुल क्रूड स्टील की क्षमता 21 करोड़ टन थी। इनमें जेएसडब्ल्यू स्टील की हिस्सेदारी 17.48 फीसदी, टाटा स्टील की 13.29 फीसदी और सेल की हिस्सेदारी 10.10 फीसदी थी।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सीसीआई की जांच 2021 में तब शुरू हुई जब बिल्डरों के एक समूह ने अदालत में मामला दायर कर आरोप लगाया था कि 9 कंपनियां मिलकर स्टील आपूर्ति को बाधित करने और कीमतें बढ़ाने का काम कर रही हैं। रॉयटर्स ने 2022 में बताया था कि सीसीआई ने उद्योग की जांच के दौरान कुछ छोटी स्टील कंपनियों पर छापा मारा था।। सीसीआई के अक्टूबर के आदेश से पता चला कि बाद में जांच का दायरा बढ़ाकर 31 कंपनियों और उद्योग समूह के साथ-साथ उद्योग के दर्जनों अधिकारियों तक कर दिया गया।