facebookmetapixel
Silver के बाद अब Copper की बारी? कमोडिटी मार्केट की अगली बड़ी कहानीAI विश्व शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे स्पेन के 80 विश्वविद्यालयों के रेक्टरभारत–कनाडा सहयोग को नई रफ्तार, शिक्षा और व्यापार पर बढ़ा फोकसIndia-EU trade deal: सीमित समझौते से नहीं मिल सकता पूरा लाभनागर विमानन मंत्री नायडू बोले: भारत अब उभरती नहीं, वैश्विक आर्थिक शक्ति हैजल्द लागू होगा DPDP ऐक्ट, बड़ी कंपनियों के लिए समय-सीमा घटाने की तैयारीनिर्यातकों की बजट में शुल्क ढांचे को ठीक करने की मांगबजट में सीमा शुल्क एसवीबी खत्म करने की मांगऑटो, ग्रीन एनर्जी से लॉजिस्टिक्स तक, दावोस में CM मोहन यादव ने बताया एमपी का पूरा प्लानमध्य भारत को समुद्र से जोड़ने वाला बड़ा प्लान सामने आया

Indian airlines: अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भारतीय एयरलाइंस पिछड़ी, विदेशी कंपनियों का दबदबा कायम

यूरोप-दक्षिण पूर्व एशिया में विदेशी विमानन कंपनियां आगे

Last Updated- September 19, 2024 | 10:36 PM IST
Air India

भारतीय विमानन कंपनियां और ज्यादा सीधी उड़ानों के साथ अंतरराष्ट्रीय आकाश में भले ही अपनी पकड़ मजबूत कर रही हों, लेकिन यूरोप और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे कई गैर पश्चिम एशियाई मार्गों पर विदेशी विमानन कंपनियां काफी आगे हैं और कई मामलों में भारत के आकाश में अपना दबदबा बनाए हुए हैं।

उदाहरण के लिए एयर एशिया को ही लीजिए। वह घरेलू आसमान पर अपनी छाप छोड़ने में विफल रही और उसने टाटा को अपनी हिस्सेदारी बेच दी। लेकिन एयर एशिया भारत से लेकर मलेशिया और यहां तक कि थाईलैंड के बाजारों में एक ताकत है।

सिरियम के आंकड़ों के अनुसार भारत-मलेशिया मार्ग पर एयर एशिया पहले स्थान पर है और सितंबर 2024 के आंकड़ों के आधार पर कुल सीट क्षमता का 46 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करती है। इसने भारतीय विमानन कंपनियों को पीछे किया हुआ है और उनके पास सामूहिक रूप से भारत से क्षमता की पांच प्रतिशत से भी कम हिस्सेदारी है।

यहां तक कि एयर एशिया थाईलैंड भी अपनी ताकत दिखा रही है। सितंबर में 17 प्रतिशत सीट क्षमता की हिस्सेदारी के साथ वह पहले ही भारत और थाईलैंड के बीच तीसरी सबसे बड़ी विमानन कंपनी है, जो एयर इंडिया और विस्तारा की संयुक्त हिस्सेदारी से भी ज्यादा है। बेशक थाई एयरवेज 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है। उसके बाद इंडिगो एयरलाइंस का स्थान है।

इंडिगो, एयर इंडिया, एआई एक्सप्रेस और विस्तारा की उड़ानों के बावजूद भारत-सिंगापुर के लोकप्रिय बाजार में सिंगापुर एयरलाइंस और उसकी सहायक कंपनी स्कूट की संयुक्त रूप से अब भी निर्विवाद रूप से बादशाहत है। सिरियम के आंकड़ों के अनुसार सितंबर में भारत और सिंगापुर के बीच दोनों के पास करीब 57 प्रतिशत सीट क्षमता है और विस्तारा का एआई के साथ विलय तथा एआई एक्सप्रेस के टाटा के पास आने के बावजूद वे सामूहिक रूप से 24.8 प्रतिशत के स्तर पर काफी पीछे हैं। लेकिन अगर इंडिगो को भी जोड़ लिया जाए, तो यह 43 प्रतिशत के करीब हो जाती है। यूरोप के मार्गों पर सीधी उड़ानों के साथ भारतीय विमानन कंपनियों की मौजूदगी अब भी नगण्य है।

First Published - September 19, 2024 | 10:36 PM IST

संबंधित पोस्ट