ऐसे समय में जब पूरा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र डिजिटल बदलाव के लिए दमदार मांग के कारण नए सिरे से रेटिंग की चुनौतियों से जूझ रहा है। हैप्पिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजिज (हैप्पिएस्ट माइंड्स) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है। कंपनी को उसके डिजिटल कारोबार से करीब 97 फीसदी राजस्व (सभी सूचीबद्ध भारतीय आईटी कंपनियों सर्वाधिक हासिल होती है और इसके कारण वृद्धि की दमदार संभावना इस आईपीओ के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
आईडीबीआई कैपिटल के विश्लेषक उर्मिल शाह के अनुसार, ‘डिजिटल कारोबार में वृद्धि की अपार संभावनाएं मौजूद हैं क्योंकिकई कारोबार फिलहाल डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ये आगे चलकर हैप्पिएस्ट माइंड्स के लिए वृद्धि के जबरदस्त अवसर सृजित करेंगे। इस प्रकार, हमारा मानना है कि यह आईपीओ निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर लेकर आया है।’
कारोबार व वित्तीय स्थिति
बेंगलूरु की कंपनी हैप्पिएस्ट माइंड्स की स्थापना प्रवर्तक अशोक सूटा ने अप्रैल 2011 में की थी। सूटा माइंडट्री के सह-संस्थापक भी रहे हैं। एक डिजिटल कंपनी के तौर पर अपनी शुरुआत करते हुए हैप्पिएस्ट माइंड्स ने एडटेक और हाइटेक श्रेणियों से 40 फीसदी से अधिक राजस्व कमाया।
केआर चोकसी के प्रमुख विश्लेक हरित शाह का मानना है कि प्रवर्तक के अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड होने के अलावा हैप्पिएस्ट माइंड्स के राजस्व स्रोत अलग हैं क्योंकि एडटेक और हाईटेक जैसी कारोबार से उसके राजस्व को जबरदस्त रफ्तार मिल रही है। वह यभी मानते हैं कि वित्त वर्ष 2022 में 20 फीसदी से अधिक राजस्व वृद्धि हासिल करने की काफी संभावना है। इसलिए इस आईपीको सूचीबद्ध होने से काफी फायदा होगा और यह दीर्घावधि में निवेशकों को अच्छा रिटर्न देगा।
राजस्व में डिजिटल कारोबार की अधिक हिस्सेदारी होने के साथ ही कंपनी ने वित्त वर्ष 2018 से 2020 के दौरान रुपये में करीब 21 फीसदी और डॉलर में करीब 17.1 फीसदी वार्षिक चक्रवृद्धि दर के साथ विकास की। दमदार वृद्धि की एक वजह कमजोर आधार भी रही। जबकि जून तिमाही (पहली तिमाही में) के दौरान रुपये में राजस्व एक साल पहेल के समान स्तर पर लगभग स्थिर रहा। जबकि डॉलर में सालाना आधार पर 8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इस मुख्य तौर पर कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण पैदा हुए व्यवधान से झटका लगा। लाभप्रदता के मोर्चे पर एबिटा मार्जिन पहली तिमाही में बढ़कर 18.5 फीसदी रहा जो वित्त वर्ष 2020 में 11 फीसदी और वित्त वर्ष 2019 में 5.1 फीसदी रहा था। दमदार परिचालन लाभ के कारण राजस्व में वृद्धि से मार्जिन को बल मिला। इस प्रकार कंपनी ने वित्त वर्ष 2020 में 73.6 करोड़ रुपये का करपूर्व लाभ दर्ज किया जो वित्त वर्ष 2019 के मुकाबले 6 गुना अधिक रहा और वित्त वर्ष 2018 में कंपनी ने 23.1 करोड़ रुपये का कर पूर्व नुकसान दर्ज किया था।
मूल्यांकन
वित्त वर्ष 2020 की आय के आधार पर इस आईपीओ को मूल्यांकन थोड़ा अधिक दिखता है। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि वृद्धि के मोर्चे पर कंपनी की क्षमता उसे सही ठहराती है। हरित शाह ने कहा कि वित्त वर्ष 2022 में 15 से 20 फीसदी कर पूर्व लाभ में वृद्धि के साथ इस आईपीओ का मूल्यांकन वित्त वर्ष 2022 के लिए अनुमानित आय के मुकाबले 16.5 से 17.3 गुना अधिक है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषक अमित चंद्रा ने भी इसी तरही के विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, ‘ऊंची डिजिटल हिस्सेदारी के साथ वृद्धि और मार्जिन के मोर्चे पर विस्तार की काफी गुंजाइश को देखते हुए हमारा मानना है कि इस आईपीओ का मूल्यांकन सही है।’