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जेनेरेटिव एआई से कर्मियों की संख्या वृद्धि पर पड़ेगा असर: इन्फोसिस

इन्फोसिस में पिछली तिमाही की तुलना में 6,000 से अधिक कर्मचारी कम हुए हैं।

Last Updated- February 29, 2024 | 12:07 AM IST
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देश की बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या में मौजूदा गिरावट उनकी बढ़ोतरी में सुस्ती की वजह से आई है तथा कंपनियां आगे चलकर कम लोगों को काम पर रखेंगी। इन्फोसिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

कंपनी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और सह-प्रमुख (डिलिवरी) सतीश एचसी का मानना है कि जेनेरेटिव एआई (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) जैसी नई प्रौद्योगिकियों से कुछ वर्षों के दौरान कर्मचारियों की संख्या वृद्धि और राजस्व का अनुपात एक रेखा में सीधे नहीं बढ़ेगा।

उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि दीर्घावधि में धीरे-धीरे हमें कम प्रतिभा की जरूरत होगी। इससे अनुपात असमान होने लगेगा। इसमें अब भी तीन से पांच साल लगेंगे। उन्होंने कहा कि इसका एक कारण प्रौद्योगिकी होगी। दो साल में हम कर्मचारियों की कम संख्या के साथ आगे बढ़ेंगे।

उन्होंने क्लासिक ऑटोमेशन का उपयोग करके तकनीकी सेवा कारोबार में प्रति वर्ष पारंपरिक उत्पादकता लाभ भी शामिल किया, जो पांच से 10 प्रतिशत हुआ करता था। उन्होंने कहा ‘लेकिन अगर आपके पास कुछ तरह यूज केस और काम की प्रकृति के लिए सही बुनियाद तथा सही परिपक्वता है, तो यह कई गुना अधिक हो सकता है।’

देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा फर्म इन्फोसिस में कर्मचारियों की संख्या वित्त वर्ष 24 की तीसरी तिमाही में 3,22,663 थी। पिछली तिमाही की तुलना में 6,000 से अधिक कर्मचारी कम हुए हैं और पिछले साल की तुलना में 24,182 कर्मचारी घटे हैं।

सतीश ने कहा कि कर्मचारियों की संख्या में मौजूदा गिरावट का जेनेरिक एआई से कोई लेना-देना नहीं है। इसके लिए उन्होंने धीमी वृद्धि के अलावा पिछले एक साल में कंपनी द्वारा की गई जरूरत से ज्यादा नियुक्तियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कंपनी अब भी कर्मचारियों की अतिरिक्त संख्या से जूझ रही है, लेकिन अगली कुछ तिमाहियों में इसे दुरुस्त करने पर विचार कर रही है।

यह पूछे जाने पर कि जेनएआई के कारण कारोबार पर क्या असर पड़ रहा है, सतीश ने कहा कि कई ग्राहक इसका उपयोग करके दक्षता बढ़ाने से कहीं अधिक चीजों पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ग्राहक के लिए हम विपणन सामग्री तैयार करना शुरू कर रहे हैं, जो पहले अत्यधिक भुगतान वाली एजेंसियों द्वारा किया जाता था।

First Published - February 29, 2024 | 12:07 AM IST

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