facebookmetapixel
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में बड़े डेवलपरों को दमदार बुकिंग से मिलेगा दमडी बीयर्स का बड़ा दांव: भारत में नैचुरल हीरों के लिए मार्केटिंग खर्च दोगुना, फॉरएवरमार्क पर फोकसBMW ने 2025 में बेच डाली 18,001 कारें, पहली बार लग्जरी खरीदारों और ईवी से मिली रफ्तारबजट से उम्मीदें: हेल्थकेयर, मेडिकल डिवाइस और फार्मा कंपनियों ने टैक्स राहत और R&D निवेश बढ़ाने की मांग कीIndiaAI Mission: 12 से 15 हजार जीपीयू खरीदने की तैयारी, सरकार जल्द आमंत्रित करेगी एक और दौर की बोलीभारत पर 500% शुल्क का जो​खिम! रूस से तेल खरीदने वालों पर ‘दंड’ लगाने वाले विधेयक को ट्रंप का समर्थनSIF सेगमेंट में बढ़ी हलचल: कई म्युचुअल फंड हाउस पहली पेशकश की तैयारी में, हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट पर सबसे ज्यादा जोरBNP Paribas का बुलिश अनुमान: दिसंबर तक 29,500 पर पहुंचेगा निफ्टी, 14% रिटर्न की संभावनाकमोडिटी इंडेक्स रीबैलेंसिंग और मजबूत डॉलर से सोना फिसला, चांदी में भी तेज गिरावट500% टैरिफ की आशंका से रुपया डगमगाया, RBI के हस्तक्षेप के बावजूद 90 प्रति डॉलर के पार फिसला

परिसमापन पर न दिखाएं खीझ : साहू

Last Updated- December 12, 2022 | 7:16 AM IST

दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत कंपनियों का समेकन अनिवार्य रूप से कोई बुरी बात नहीं है क्योंकि बाजार एक व्यावहारिक कंपनी को ही बचाता है। ये बातें आज भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के चेयरमैन एमएस साहू ने कही।
बुनियादी ढांचा क्षेत्र में फंसे हुए ऋण पर आयोजित फिक्की के सेमिनार को संबोधित करते हुए साहू ने कहा, ‘उपयुक्त मामलों के परिसमापन पर खीज न दिखाएं। जब बाजार इस नतीजे पर पहुंचता है कि अब कंपनी को उबारने के लिए कोई व्यवहारिक समाधान योजना नहीं है तब वह परिसमापन की ओर बढ़ता है।’  
साहू उस आलोचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे कि आईबीसी के पास आए मामलों में से केवल 25 फीसदी का ही समाधान हो पाया जबकि बाकी का परिसमापन हुआ। उन्होंने कहा कि बहुत ही कम कंपनियां ऐसी थी जिनके पास मामूली संपत्ति थी या कॉर्पोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में आने के समय पर निष्क्रीय थी।
आईबीबीआई प्रमुख ने कहा कि दबावग्रस्त संपत्तियों में परिसमापन में जाने वाली कंपनियों में से 75 फीसदी की हिस्सेदारी केवल 25 फीसदी थी। उन्होंने कहा, ‘यदि किसी के पास संपत्ति है तो इसका मतलब है कि उसमें सुधार होने की उम्मीद है। इन मामलों में आईबीसी उपलब्ध संपत्ति के मूल्य को अधिकतम बढ़ाने का प्रयास करता है न कि उस संपत्ति के मूल्य को बढ़ाता है जो है ही नहीं।’
उन्होंने कहा कि परिसमापन या बचाव बाजार की ताकतों का परिणाम है और कानून उसे केवल प्रभावी बनाता है। उन्होंने कहा, ‘यदि कीमत ठीक हो तो सबसे अधिक सड़े हुए टमाटर बिकते हैं।’
अब तक करीब 4,000 कंपनियों को कॉर्पोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इनमें से 2,000 की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और करीब 300 से 350 का समाधान समाधान योजना के तहत किया गया है।
सफल समाधान योजना पाने वाली इन 300 से 350 कंपनियों का परिसमापन मूल्य दावा किए गए रकम का करीब 22 फीसदी था। इन कंपनियों में ऋणदाताओं को अपने दावा का 45 फीसदी प्राप्त हुआ जो परिसमापन मूल्य का करीब 200 फीसदी था।

First Published - March 10, 2021 | 12:29 AM IST

संबंधित पोस्ट