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प्रॉपर्टी बाजार पर काले बादल और गहराने के आसार

Last Updated- December 07, 2022 | 7:43 AM IST

रेपो रेट व सीआरआर में बढ़ोतरी से प्रॉपर्टी बाजार पर मंडरा रहे काले बादल और गहरे होने के आसार हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार से खरीदार नदारद हो जाएंगे और छोटे डेवलपर्स को काम जारी रखने में मुश्किलें आएंगी। प्रॉपर्टी बाजार की स्थिति में अब सुधार तभी होगा जब महंगाई दर कम होगी और नयी मांग निकलेंगी।

पार्श्वनाथ डेवलपर्स के सीईओ बीपी ढाका कहते हैं, ‘ब्याज दर के बढ़ते ही निश्चित रूप से रियल एस्टेट में ठहराव आ जाएगा। प्रॉपर्टी बाजार पर इस बढ़ोतरी से दोहरी मार पड़ेगी। लोन महंगा होने से असली खरीदार काफी कम हो जाएंगे और बाजार से तरलता कम होने पर डेवलपर्स की दिक्कतें और बढ़ जाएंगी।’ उन्होंने बताया कि जो लोग घर खरीदने के मामले में सोच विचार कर रहे थे वे इस फैसले से हताश हो जाएंगे।

मांग में गिरावट से छोटे-छोटे डेवलपर्स को अपनी परियोजना आगे बढ़ाने में भी मुश्किलें आएंगी। उन्होंने बताया, ‘तेजी से बढ़ती महंगाई दर को रोकने के लिए सरकार के सामने सीमित विकल्प ही है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत महंगाई रोकने के लिए पारंपरिक रास्ते ही अपना रहा है। अंततराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ना भारत में महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह नहीं है। दरअसल, महंगाई इसके प्रभाव के कारण बढ़ रही है।’

रियल एस्टेट की कंसल्टेंसी व रिसर्च फर्म सेंचुरी 21 इंडिया के एमडी डॉ. देवेंद्र गुप्ता भी कमोबेश यही राय रखते हैं। उनके मुताबिक प्रॉपर्टी के बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना लाजिमी है। अब घर खरीदने वालों के लिए एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई जैसी स्थिति बन जाएगी। लेकिन प्रॉपर्टी के कमर्शियल बाजार पर बहुत फर्क नहीं पड़ने वाला है क्योंकि वहां पहले से ही बहुत तेजी है।

पैरामाउंट डेवलपर्स के विपणन प्रमुख कुलभूषण गौड़ कहते हैं, ‘अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती हैं तो इसका प्रभाव सीधे तौर पर मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। उनके लिए मकान खरीदना अब और मुश्किल हो जाएगा। उच्च वर्ग पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उनके पास पहले से ही भुगतान करने लायक पैसा है। वे व्यावसायिक निवेश से अपना हाथ जरूर खींच लेंगे।’

नाइट फ्रैंक इंडिया के पूर्व निदेशक (नार्थ) जयंत वर्मा के मुताबिक प्रॉपर्टी बाजार में पहले से ही निवेशकों की कमी हो गयी थी अब बचे हुए निवेशक भी निवेश करने से पीछे हट जाएंगे। आने वाले एक-डेढ़ साल तक किसी भी तरह के उठाव की गुंजाइश नहीं है। मुद्रास्फीति के कम होने व ब्याज दरों में कमी होने पर ही प्रॉपर्टी बाजार में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में प्रॉपर्टी के दामों में भी गिरावट होगी। खास कर उन इलाकों में जो अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए है। इसके अलावा जिन लोगों ने पैसा कमाने के लिहाज से निवेश कर रखा था उन्हें घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

First Published - June 25, 2008 | 11:43 PM IST

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