हालांकि सरकार अपना निर्णय वापस लेकर शेयर में नुकसान को नियंत्रित करने में सफल रही है, लेकिन फिर भी आईआरसीटीसी कन्वेंस शुल्क विवाद का निवेशक धारणा पर प्रभाव पड़ सकता है। यह दबाव पीएसयू शेयरों पर ज्यादा देखा जा सकता है, जिनमें से कई शेयर पहले ही अपने निजी क्षेत्र के प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बड़ी गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं।
गुरुवार को, बाजार बंद होने के बाद आईआरसीटीसी ने एक्सचेज को दी जानकारी में कहा कि उससे आधा कन्वेंस शुल्क रेल मंत्रालय के साथ साझा करने को कहा गया है। निवेशकों ने इस निर्णय को नकारात्मक तौर पर लिया है और यह शेयर शुक्रवार को दिन के कारोबार में 29 प्रतिशत गिर गया था जिससे 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बाजार पूंजीकरण नुकसान को बढ़ावा मिला।
हालांकि सरकार ने अपना निर्णय वापस ले लिया, और शेयर में हुए नुकसान की ज्यादातर भरपाई हो गई।
विश्लेषकों का कहना है कि सरकार के त्वरित कदम के बावजूद पूरे विवाद का पीएसयू में आगामी निवेश निर्णयों को लेकर निवेशक धारणा पर दबाव पड़ सकता है।
चूड़ीवाला सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक आलोक चूड़ीवाला ने कहा, ‘इस विवाद से कई सवाल खड़े हुए हैं। हमने यह महसूस किया है कि पीएसयू शेयर राजधानी दिल्ली में बैठे कुछ नौकरशाहों के कदमों के शिकार होते हैं, भले ही वे इक्विटी बाजारों से संबंधित इन फैसलों से अवगत हो सकते हैं या नहीं। हालांकि इस शेयर में बदलाव के बाद सरकार ने तत्परता दिखाई है।’
स्वतंत्र विश्लेषक अंबरीश बालिगा का कहना है, ‘राजस्व विभाजन विवाद का शेयर और पीएसयू आधार पर दबाव पड़ेगा, क्योंकि हम नहीं जानते कि इसकी तरह अन्य क्या निर्णय आ सकते हैं। निवेशक धारणा को नुकसान पहुंचा है। कई छोटे निवेशकों को रकम गंवानी पड़ेगी।’ विश्लेषकों का कहना है कि पीएसयू शेयरों में निवेश के संदर्भ में नियामकीय और नीतिगत अनिश्चितता सबसे बड़ा जोखिम कारक है। 19 अक्टूबर को, आईआरसीटीसी का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया था। कन्वेंस शुल्क विवाद इसका स्पष्ट उदाहरण है कि किस तरह से शेयर वैल्यू रातोंरात प्रभावित हो सकती है।