facebookmetapixel
Dividend Stocks: जनवरी का आखिरी हफ्ता निवेशकों के नाम, कुल 26 कंपनियां बाटेंगी डिविडेंडDGCA के निर्देश के बाद इंडिगो की उड़ानों में बड़ी कटौती: स्लॉट्स खाली होने से क्या बदलेगा?रूसी तेल की खरीद घटाने से भारत को मिलेगी राहत? अमेरिका ने 25% टैरिफ हटाने के दिए संकेतBudget 2026: विदेश में पढ़ाई और ट्रैवल के लिए रेमिटेंस नियमों में बदलाव की मांग, TCS हो और सरलघर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं? RBI की दर कटौती के बाद जानें कहां किस रेट पर होम लोन मिल रहा हैदिल्ली में बारिश, पहाड़ों पर बर्फबारी: उत्तर भारत में बदला मौसम का मिजाज, पश्चिमी विक्षोभ ने बढ़ाई ठंडGDP गणना में होगा ऐतिहासिक बदलाव: नई QNA सीरीज अगले महीने से लागू, आंकड़ों में आएगी सटीकताVisa फ्लेक्स जल्द ही भारत में आएगा, एक ही कार्ड से डेबिट और क्रेडिट दोनों का मिलेगा लाभबिकवाली और आयातकों की मांग से रुपया डॉलर के मुकाबले 91.96 पर, एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बनीIndusInd Bank Q3 Results: मुनाफे पर पड़ा भारी असर, लाभ 91% घटकर ₹128 करोड़ पर पहुंचा

विदहो​ल्डिंग कर दर में वृद्धि से चिंता, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की देसी इकाइयों पर ज्यादा असर नहीं

Last Updated- April 01, 2023 | 12:02 AM IST
India's total tax receipts likely to exceed Budget Estimate in FY24

वै​श्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) की सूचीबद्ध भारतीय सहायक इकाइयों ने कैलेंडर वर्ष 2021/वित्त वर्ष 2022 में अपनी पैतृक कंपनियों को रॉयल्टी और टेक्नीकल शुल्क भुगतान के तौर पर करीब 7,000 करोड़ रुपये खर्च किए। कैपिटालाइन डेटाबेस के अनुसार, करीब आधी से ज्यादा रकम (3,770 करोड़ रुपये) यूरोपीय और अमेरिकी एमएनसी की घरेलू सहायक इकाइयों द्वारा चुकाई गई थी, जिनमें हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले इंडिया, कोलगेट-पामोलिव, बीएएसएफ इंडिया, और बॉश मुख्य रूप से शामिल थीं।

इन एमएनसी की भारतीय सहायक इकाइयों ने अब तक अपनी पैतृक कंपनियों को रॉयल्टी और टेक्नीकल शुल्कों के भुगतान पर 10 प्रतिशत की दर से विदहो​ल्डिंग कर चुकाया है। सोमवार को संसद में पारित वित्त विधेयक में विदहो​ल्डिंग कर की दर अब दोगुनी कर 20 प्रतिशत की गई है। हालांकि इस वृद्धि का कई भारतीय सहायक इकाइयों पर काफी कम विततीय प्रभाव पड़ने का अनुमान है। विदहो​ल्डिंग कर स्रोत पर काटा जाने वाला एक तरह का कर है, जिसके लिए रॉयल्टी या टेक्नीकल शुल्क का भुगतान करने वाली कोई भारतीय कंपनी तय दर पर कर काटती है। यह कर भुगतानकर्ता द्वारा चुकाया जाता है और भुगतान प्राप्त करने वाले पर नहीं लगता है।

भारत ने दुनिया में 96 देशों के साथ कर समझौते कर रखे हैं जिससे रॉयल्टी और टेक्नीकल शुल्क के भुगतान पर विदहोल्डिंग कर कई देशों के साथ 10 प्रतिशत पर सीमित है। इनमें दुनिया के कई देश शामिल हैं। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, द​क्षिण कोरिया, चीन, फ्रांस, जर्मनी, ओर ​स्विटजरलैंड मुख्य रूप से शामिल हैं। भारत में परिचालन कर रही कई एमएनसी इन्हीं कुछ प्रमुख देशों से हैं।

सूचीबद्ध क्षेत्र में, वित्त वर्ष 2022 में मारुति सुजूकी रॉयल्टी और टेक्नीकल शुल्कों (3,005 करोड़ रुपये) पर खर्च करने वाली सबसे बड़ी कंपनी थी, जिसके बाद हिंदुस्तान यूनिलीवर (852 करोड़ रुपये) का स्थान रहा। इस सूची में अन्य कंपनियां थीं नेस्ले इंडिया, कोलगेट-पामोलिव, बॉश, हिताची एनर्जी, एबीबी, पीऐंडजी हाइजीन, शेफलर इंडिया, और एकजो नोबल। इन 10 कंपनियों ने कैलेंडर वर्ष 2021/वित्त वर्ष 2022 में रॉयल्टी और टेक्नीकल शुल्कों पर संयुक्त रूप से 5,120 करोड़ रुपये खर्च किए। आरबीआई के अनुसार, देश में सभी कंपनियों (सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध) ने वित्त वर्ष 2022 में बौद्धिक संप​त्ति के इस्तेमाल के लिए रॉयल्टी और टेक्नीकल शुल्कों पर संयुक्त रूप से 9.04 अरब डॉलर या करीब 68,551 करोड़ रुपये खर्च किए।

इसे ध्यान में रखते हुए विश्लेषकों का कहना है कि कई एमएनसी की भारतीय सहायक इकाइयां कर सं​धियों के प्रावधानों का इस्तेमाल करेंगी और 10 प्रतिशत की पूर्ववर्ती दर पर विदहो​​ल्डिंग कर का भुगतान बरकरार रखेंगी। हालांकि इससे उनकी अनुपालन लागत बढ़ जाएगी, क्योंकि पैतृक कंपनी को अब भारत के कर समझौते वाले देशों में होना या वहां उसका मुख्यालय होना अनिवार्य होगा। कई एमएनसी सिंगापुर और मॉरिशस जैसे क्षेत्रों में ​मौजूदा निवेश कंपनियों के जरिये अपनी भारतीय सहायक इकाइयों में स्वामित्व रखती हैं। वित्त विधेयक में कर दर बढ़ने के बाद, कुछ एमएनसी को अपनी भारतीय सहायक इकाइयों के स्वामित्व ढांचे को पुनर्गठित करना पड़ सकता है, जिस पर बड़ी अनुपालन और नियामकीय लागत आएगी।

विदहो​ल्डिंग कर दर दोगुनी होने से इटली और डेनमार्क की एमएनसी की भारतीय सहायक इकाइयों पर ज्यादा दबाव पड़ेगा।

First Published - April 1, 2023 | 12:02 AM IST

संबंधित पोस्ट