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स्थानीय जरूरत के मुताबिक ब्रांड बदल रहे अपनी सूरत

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Last Updated- December 10, 2022 | 11:10 AM IST

रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियां देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय उपभोक्ताओं की खास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने उत्पादों में बदलाव कर रही हैं। इससे उन्हें बाजार में मौजूद विभिन्न स्थानीय ब्रांडों से मुकाबला करने और अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी। 
प्रमुख एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) ने हाल में विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा कि उसने अपनी ‘विनिंग इन मैनी इंडियाज’ रणनीति के तहत प्रमुख चायपत्ती ब्रांड ब्रुक बॉन्ड को देश में विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न स्वाद के साथ उतारा है। प्रमुख साबुन ब्रांड लक्स को भी देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग सुगंध के साथ उतारा गया है। 
एचयूएल ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए सर्फ एक्सेल का अलग-अलग फॉर्मूलेशन भी तैयार किया है। इसे मुख्य तौर पर विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध पानी में अंतर को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हालांकि एचयूएल इसके जरिये खुद को अन्य कंपनियों से अलग बताती है लेकिन वह एकमात्र ऐसी कंपनी नहीं है जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की जरूरतों में बदलाव के लिहाज से अपने उत्पादों का स्थानीयकरण कर रही है। 
डाबर इंडिया ने भी स्थानीय आधार पर उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने कुछ उत्पादों में बदलाव किया है। उसने अपनी प्रोजेक्ट राइज योजना के तहत देश को 12 भौगोलिक क्लस्टरों में विभाजित करते हुए हरेक क्षेत्र की खास क्षेत्रीय जरूरतों को लक्ष्य किया है। 
डाबर इंडिया ने अपने इस कार्यक्रम के तहत पंजाब के लिए फेम फ्रूट ब्लीच, उत्तर प्रदेश के लिए हर्बल ब्लीच और पूर्वोत्तर के लिए फ्रूट ओआरएस (फ्रूट जूस पर आधारित ओआरएस) लॉन्च किया है। डाबर च्यवनप्राश बनाने वाली कंपनी ने पश्चिम भारत के लिए अदुलसा जड़ी-बूटी से युक्त हनीटस अदुलसा कफ सिरप तैयार किया है। 
डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा, ‘पूरे भारत को एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता। यह विभिन्न क्लस्टरों का समूह है जहां हरेक क्लस्टर में उपभोक्ताओं की खास पसंद है।’ उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत विभिन्न क्लस्टरों से उपभोक्ताओं, पैकेजिंग एवं मीडिया से जानकारियां जुटाई जाती हैं और उनका विश्लेषण करने के बाद उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस रणनीति से निष्पादन, निवेश, वितरण और उपभोक्ताओं के बीच प्रचार-प्रसार में मदद मिलती है।
दौलत कैपिटल के उपाध्यक्ष सचिन बबोडे ने कहा, ‘उत्पादों का स्थानीयकरण राष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करने वाली कंपनियों के पक्ष में है क्योंकि इससे उन्हें स्थानीय कंपनियों  से मुकाबला करने में मदद मिलती है।’ उन्होंने कहा कि कंपनियां आगे भी इस फॉर्मूले का उपयोग जारी रखेंगी क्योंकि इससे उन्हें अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने भी पिछले साल के आखिर में मुंबई में स्थानीय उपभोक्ताओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए खास स्वाद के साथ चायपत्ती को उतारा था। इसी प्रकार उसने देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय पसंद के लिहाज से विभिन्न उत्पाद उतारे थे। 
फिलिप कैपिटल इंडिया के उपाध्यक्ष (अनुसंधान- उपभोक्ता एवं खुदरा क्षेत्र) विशाल गुटका ने कहा, ‘भारत के विभिन्न हिस्सों में लोगों के स्वाद और पसंद में अंतर है। इसलिए कई एफएमसीजी कंपनियां अब खास क्षेत्र के लिए विशेष उत्पाद उतार रही हैं। इससे उन्हें स्थानीय प्रतिस्पर्धा से निपटने में मदद मिलेगी।’

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First Published - November 20, 2022 | 9:33 PM IST

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