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बीपीओ कर्मचारी घर से कर सकेंगे काम, लेकिन उद्योग हो रहे हैं परेशान

Last Updated- December 07, 2022 | 5:03 PM IST

दूरसंचार विभाग अब बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग (बीपीओ) कर्मचारियों को घर से काम करने की मंजूरी देने पर विचार कर रहा है। लेकिन इसी के साथ बीपीओ कंपनियों की चिंता और भी बढ़ जाती है।


बीपीओ कंपनियों के अनुसार सुरक्षा से संबंधित चिंता और बुनियादी सुविधाओं और तकनीकी सुधार में तुरंत निवेश की जरूरत है। यूं तो आईटी कंपनियों में डाटा चोरी होने की बात नई नहीं है, लेकिन गुड़गांव की बीपीओ साइबरसिस इन्फोटेक लिमिटेड के दो कर्मचारियों को गुड़गांव पुलिस ने गोपनीय डाटा प्रतिस्पर्धी कंपनियों को बेचने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया था।

यह कोई आम डाटा चोरी का मामला नहीं था। इस कंपनी ने ब्रिटेन की कंपनी सिटी क्रेडिट मैनेजमेंट के साथ एक विशेष करार किया था, जिसके चलते एक कर्मचारी साइबरसिस के मंडल में सिटी क्रेडिट के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुआ था। इस काम में मॉर्गेज संबंधी काम किया जाता था। इस काम के लिए साइबरसिस ने बड़ा निवेश कर प्रशिक्षण मैनुअल और सिस्टम्स तैयार किए।

और उसके बाद जो हुआ वह सब जानते हैं। इन दोनों कर्मियों के जरिये मैनुअल और सिस्टम्स को चुरा कर अन्य बीपीओ कंपनियों को बेचा गया। जितनी भी बीपीओ कंपनियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत की उनका कहना है कि मौजूदा हालत में उपभोक्ता डाटा की गोपनीयता और निजता के प्रति बेहद सख्त हैं।

फर्स्टसोर्स के मुख्य तकनीक अधिकारी संजीव दलाल का कहना है, ‘कंपनियों को अब उन कामों को अलग करना होगा, जिन्हें घर से करने की मंजूरी दी जा सकती है। आप कुछ प्रक्रियाओं को बदल सकते हैं, लेकिन ये कुछ खास एप्लीकेशंस के साथ ही काम करती हैं और जिसके लिए री-इंजीनियरिंग उपकरणों की जरूरत है।

इसके बावजूद कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्क्रीन की तस्वीरें न निकाली जाएं या नाम, पता और जन्मतिथि संबंधित विवरण को लिखा न जाए।’ तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को तीन बातें- नेटवर्क सुरक्षा, आईटी एप्लीकेशंस और मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखना होगा।

एस्सेंडिया कंसल्टेंसी के मुख्य विश्लेषक आलोक शिंदे का मानना है कि अभी इतने हाई-एंड सुरक्षित नेटवर्क मौजूद हैं कि कंपनियां इस जोखिम को कम करने के लिए आगे कूट लेखन को अपना सकती हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के मामले में उन्हें विभिन्न स्तरों पर एप्लीकेशन पर नजर रखनी होगी।

कंपनियां अपने कर्मियों पर नजर रखने के लिए हमेशा कॉल मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर सकती हैं। शिंदे का कहना है, ‘इस तरह की कार्यप्रणाली हमने ब्रिटेन में देखी है। भारतीय कंपनियों के लिए इससे लागत में जरूर कमी आएगी, खासतौर पर रियल एस्टेट की लागत जो तेजी से बढ़ रही है। जहां तक जोखिम को कम करने की बात है तो इसे नियंत्रित माहौल में भी नहीं रोका जा सकता।’

विशेषज्ञ मानते हैं कि टेलीमार्किंट काम को घर से किया जाता है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है, ‘उदाहरण के लिए जब एक उपभोक्ता फोन करेगा, तब कर्मचारी को इस बात का ध्यान रखना होगा कि पीछे से किसी तरह की आवाज न आए।’

एजिसबीपीओ के प्रबंध निदेशक और ग्रुप मुख्य कार्यकारी अपारूप सेनगुप्ता का कहना है, ‘दूरसंचार विभाग की और से यह बढ़िया प्रयास है। इस योजना को लागू करना किस तरह का कार्यक्रम है, इस पर निर्भर करेगा।’ कंपनी घर पर एजेंट योजना का कुछ हिस्सा लागू करेगी। ऐसे एजेंटों के लिए कंपनी ने साफ तौर पर कहा है कि क्रेडिट कार्ड या बैंक खाते की संख्या पता करना उपभोक्ता की गोपनीयता के खिलाफ हो सकता है। कंपनी की योजना एजेंटों के लिए जांच कराने की भी है।

ईएक्सएल सर्विसेज के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी रोहित कपूर मानते हैं कि कुछ ऐसे भी मामले हैं जिनमें अगर लोगों की पहुंच कंपनी के उपभोक्ताओं की गोपनीय जानकारी तक हो गई, तो उन्हें दफ्तर के बाहर नियंत्रित कर पाना मुश्किल है। 247 कस्टमर के संस्थापक और मुख्य जनसंपर्क अधिकारी एस नागराजन का कहना है, ‘हम इस फैसले को लागू नहीं कर पाएंगे, क्योंकि इसमें गुणवत्ता और सुरक्षा में कमी होने की उम्मीद है।’

First Published - August 15, 2008 | 4:30 AM IST

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