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उद्योग जगत के मुनाफे में उछाल

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Last Updated- December 12, 2022 | 4:33 AM IST

कोविड-19 महामारी से पैदा हुए संकट के बावजूद, सूचीबद्घ कंपनियों का शुद्घ लाभ (जीडीपी के प्रतिशत के तौर पर) वित्त वर्ष 2021 में 2.6 प्रतिशत की चार वर्षीय ऊंचाई पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2021 की आखिरी तिमाही में, भारत की प्रमुख 200 कंपनियों का शुद्घ लाभ चक्रीयता शेयरों द्वारा दर्ज मजबूत आय की मदद से दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया।
वित्त वर्ष 2020 में, मुनाफा-जीडीपी अनुपात घटकर 1.8 प्रतिशत के दो दशक निचले स्तर पर रह गया था। वित्त वर्ष 2021 के लिए इस अनुपात में वृद्घि से संकेत मिलता है कि गैर-सूचीबद्घ या असंगठित क्षेत्र की कंपनियों पर महामारी का ज्यादा प्रभाव पड़ा।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा है, ‘जीडीपी के मुकाबले मजबूत सूचकांक आय परिदृश्य का मुख्य कारण यह है कि ज्यादातर आर्थिक प्रभाव असंगठित क्षेत्र में देखा गया और यह काफी हद तक लीजर, ट्रैवल और रिटेल जैसी आर्थिक गतिविधियों तक सीमित था। इन क्षेत्रों का मुख्य निफ्टी-50 सूचकांक में अपेक्षाकृत कम आय भारांक है।’
ब्रोकरेज ने कहा है कि सूचीबद्घ कंपनियों की आय वृद्घि सामान्य जीडीपी वृद्घि को पार कर जाएगी, जिससे वित्त वर्ष 2023 में मुनाफा-जीडीपी अनुपात में और ज्यादा सुधार को बढ़ावा मिलेगा।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज में रणनीतिकारों विनोद कार्की और सिद्घार्थ गुप्ता ने एक रिपोर्ट में कहा है, ‘कोविड की दूसरी लहर के गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव के बावजूद, निफ्टी-50 का वित्त वर्ष 2022 का आय परिदृश्य अब तक 730 रुपये पर मजबूत बना हुआ है, जिससे मुख्य सूचकांक आय पर सीमित प्रभाव का संकेत मिलता है। यह विभिन्न एजेंसियों द्वारा अब तक वित्त वर्ष 2022 के जीडीपी अनुमानों में कटौती के निर्णयों के विपरीत है। वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही का परिणाम काफी हद तक कई तटस्थ परिणामों के अनुरूप है।’
वित्त वर्ष 2008 में अपने ऊपरी स्तर पर, यह योगदान 7.8 प्रतिशत पर दर्ज किया गया था। तब से इसमें गिरावट का रुझान बना हुआ था। कॉरपोरेट आय वृद्घि पिछले पांच वर्षों में काफी हद तक ठहरी हुई थी। इसका वैश्विक औसत करीब 4.7 प्रतिशत है। भारत का दीर्घावधि औसत ललगभग 4.4 प्रतिशत है।
शीर्ष-100 कंपनियों में से, 19 प्रतिशत को मार्च 2021 तिमाही के लिए बाजार अनुमानों को मात देने में सफलता मिली, जबकि 21 कंपनियों के आंकड़े अनुमानों के मुकाबले कमजोर रहे।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि आय को चक्रीयता संबंधित शेयरों से मदद मिली है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘अर्थव्यवस्था के निवेश और निर्माण घटक पर प्रभाव प्रवासी श्रमिकों की किल्लत और आपूर्ति शृंखला संबंधित समस्याओं तक सीमित रहा है, जो पहली लहर के मुकाबले काफी कम दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, उत्पादन लागत दबाव से आय परिदृश्य ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है जिससे लागत को तर्कसंगत बनाने की क्षमता का संकेत मिलता है।’

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First Published - May 21, 2021 | 11:05 PM IST

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