एएम/एनएस इंडिया ने वाहन फर्मों संग अनुबंधों की कीमतें बढ़ाई

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 11:45 PM IST

आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) ने जुलाई से सितंबर की अवधि के लिए प्रमुख वाहन कंपनियों के साथ अनुबंध निर्धारित किए हैं। इसके तहत कीमतों में 8 से 9 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इस्पात कीमतों में तेजी के कारण यह इजाफा किया गया है जिसका बोझ अंतत: उपयोगकर्ताओं के कंधों पर डाला जा रहा है।
एएम/एनएस इंडिया के मुख्य विपणन अधिकारी रंजन धर ने कहा, ‘हमने अधिकतर ओईएम (मूल उपकरण विनिर्माताओं) के साथ जुलाई से सितंबर तिमाही के लिए अनुबंध निर्धारित किए हैं और हम छमाही अनुबंधों में भी बदलाव कर रहे हैं। इसलिए हमने वित्त वर्ष 2022 की दूसरी छमाही के लिए अनुबंधों को भी अंतिम रूप दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘यह बढ़ोतरी दो भागों में की जाएगी और हरेक अवधि में करीब 8 से 9 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। पहली निपटान अवधि जुलाई से सितंबर और दूसरी निपटान अवधि दूसरी छमाही होगी।’
समझा जाता है कि अन्य प्रमुख इस्पात कंपनियां भी अपने अनुबंधों पर बातचीत कर रही हैं। सूत्रों ने संकेत दिया कि जेएसडब्ल्यू स्टील सितंबर तिमाही के लिए अपने अनुबंध को खत्म करने के लिए बातचीत कर रही है जिसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। टाटा स्टील के अनुबंधों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और एएम/एनएस इंडिया वाहन कंपनियों की करीब 90 फीसदी इस्पात जरूरतों को पूरा करती हैं। वाहन अनुबंधों के लिए चर्चा काफी लंबी होती है। उदाहरण के लिए, अधिकतर कंपनियों ने जून तिमाही के अनुबंधों को कीमतों में 10 से 12 फीसदी की वृद्धि के साथ जून के अंत में पूरा किया है।
वैश्विक स्तर पर इस्पात कीमतों में तेजी ने इस्पात कंपनियों को अपने ग्राहकों के साथ अनुबंधों को संशोधित करने के लिए मजबूर किया है। उदाहरण के लिए, जून में घरेलू बाजार में फ्लैट इस्पात की कीमतें करीब दोगुना होकर 72,000 रुपये प्रति टन हो गईं जो एक साल पहले 38,000 रुपये प्रति टन थीं। इसी प्रकार लॉन्ग स्टील के दाम 1.4 गुना बढ़कर 57,900 रुपये प्रति टन हो गए। हालांकि वाहन कंपनियों के लिए अनुबंध कीमतें इससे कम हैं।
कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण जूलाई से सितंबर की अवधि में घरेलू बाजार में इस्पात की कीमतों में नरमी रही। लेकिन अक्टूबर के बाद उसमें काफी तेजी दर्ज की गई। मांग बढऩे के साथ-साथ लागत में इजाफा होने से भी कीमतों में तेजी को बल मिला। इस महीने की गई हालिया वृद्धि के बाद फ्लैट इस्पात की कीमतें जून के स्तर तक पहुंच गई हैं जबकि लॉन्ग स्टील की कीमतें उससे कहीं अधिक हैं।
धर ने कहा, ‘हम वाहन कंपनियों के लिए सूचकांक आधारित मूल्य निर्धारण पर अमल करते हैं। कुल मिलाकर इस्पात मूल्य सूचकांकमें 15,000 से 19,000 रुपये प्रति टन का इजाफा हुआ है लेकिन हमने कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की ताकि हमारे वाहन ग्राहकों पर तत्काल कोई प्रभाव न पड़े क्योंकि वे फिलहाल चिप किल्लत से जूझ रहे हैं।’

First Published : November 5, 2021 | 11:39 PM IST