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आईबीसी निलंबित करने की सलाह

Last Updated- December 12, 2022 | 5:08 AM IST

कोविड-19 वैश्विक महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर भारतीय लेनदारों को ऋण समाधान के लिए कंपनियों को ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) 2016 के तहत नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में ले जाने के लिए कोई जल्दबाजी नहीं है। वकीलों का कहना है कि उद्योग से संकेत लेते हुए लेनदार आईबीसी प्रक्रिया को एक बार फिर निलंबित करने के लिए सरकार से आग्रह करने की योजना बना रहे हैं। इससे कंपनियों को वैश्विक महामारी से निपटने के लिए अपनी वित्तीय स्थिति को दुरुस्त करने का अवसर मिलेगा।
वकीलों ने कहा कि विभिन्न राज्यों द्वारा विभिन्न रूपों में पाबंदियां लगाए जाने के कारण देश भर में एनसीएलटी, नई दिल्ली में एनसीएलएटी (नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल), देश भर में विभिन्न उच्च न्यायालयों और नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय के कामकाज केवल अत्यावश्यक मामलों और वीडियो कॉन्फेंस के जरिये सुनवाई तक सीमित हो गए हैं। ऐसे में वकील अपने कार्यालय अथवा ट्रिब्यूनल या अदालतों में उपस्थित होने में असमर्थ हैं। इसी प्रकार, वादी भी कार्यालय में उपस्थित होने और कार्यालय के रिकॉर्ड तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
डीएसके लीगल के पार्टनर नीरव शाह ने कहा, ‘ऐसे यदि आईबीसी को अप्रैल 2021 से अगले 3 या 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया जाए तो यह कहीं अधिक व्यावहारिक पहल होगी। उसके बाद इसी साल सितंबर से अक्टूबर के दौरान सरकार यह आकलन कर सकती है कि क्या भारत कोविड-19 की दूसरी लहर से उबर गया और ट्रिब्यूनल/ अदालतों के कामकाज को सामान्य करना कहां तक संभव होगा। यदि सरकार को लगता है कि अदालतों/ ट्रिब्यूनलों के कामकाज को सुचारु करना व्यावहारिक है तो वह आईबीसी के निलंबन को खत्म करने पर विचार कर सकती है।’
आईबीसी के निलंबन के साथ ही सरकार को एक बार फिर कोविड-19 विनियमन भाग 2 (पिछले साल आरबीआई द्वारा पेश किए गए नियमों की तरह) लाने पर विचार करना चाहिए। इससे कंपनियों और लेनदारों को उन कंपनियों को पुनर्जीवित करने का अवसर मिलेगा जहां पुनरुद्धार की गुंजाइश है। उन्होंने कहा, ‘इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि जो कंपनियां पुनिर्जीवित करने लायक हैं उन पर आईबीसी का हथौड़ा नहीं चलेगा। आज हम जिस आपात स्थ्थिति का सामना कर रहे हैं उसमें यह सबसे अधिक व्यावहारिक प्रतीत होता है।’
कोविड-19 वैश्विक महामारी की दूसरी लहर से छोटी और मझोली कंपनियों को तगड़ा झटका लगने की आशंका है क्योंकि उनके उत्पादों और सेवाओं की मांग घट जाएगी। एक बैंक को सलाह दे रहे वकील ने कहा, ‘महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख बाजारों में लॉकडाउन लगाए जाने से तमाम कंपनियों के बहीखाते को झटका लगेगा। लेनदार अब कम से कम अगली दो तिमाहियों के लिए कंपनियों को एलसीएलटी ले जाने से परहेज करेंगे।’
सरकार ने मार्च 2020 में आईबीसी को इस साल मार्च के लिए निलंबित कर दिया था ताकि कंपनियों को लॉकडाउन के कारण पैदा हुई चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सके। इसी साल मार्च में आईबीसी के कामकाज को सुचारु किया गया था लेकिन बैंक कंपनियों को एनसीएलटी ले जाने में अधिक दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। भारतीय ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया बोर्ड (आईबीबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2020 में दिवालिया मामलों की संख्या 1,717 थी जो सितंबर 2020 के मुकाबले लगभग 12 फीसदी कम है।

First Published - May 5, 2021 | 11:49 PM IST

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