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सीटीटी के खिलाफ पवार

Last Updated- December 05, 2022 | 4:53 PM IST

वायदा कारोबार का समर्थन करते हुए कृषि मंत्री शरद पवार ने कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स को वापस लेने का अनुरोध किया है।


पवार ने कहा है कि वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को इस पर एक बार फिर विचार करना चाहिए क्योंकि उनके इस कदम से फारवर्ड मार्केट कमिशन और एक्सचेंज दोनों में नाराजगी है।


शरद पवार ने कहा कि हमने वित्त मंत्री को इस बाबत पत्र लिखा है और अनुरोध किया है कि वे इस पर एक बार फिर से विचार करें। गौरतलब है कि सीटीटी लगाए जाने से भारत में वायदा कारोबार करना काफी मुश्किल भरा हो जाएगा क्योंकि कारोबारियों की लागत बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि कारोबारी चाहते हैं कि इस टैक्स को वापस ले लिया जाए।


प्रस्तावित 0.017 फीसदी कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स लगाए जाने की खबर से तीनों मुख्य एक्सचेंज और कमोडिटी रेग्युलेटर एफएमसी ने नाराजगी जताई थी। इन्होंने पवार से कहा था कि वे वायदा कारोबार केमौत की आवाज सुन रहे हैं। पवार हालांकि इस बात से सहमत नहीं दिखे कि वायदा कारोबार की बदौलत भारत में कमोडिटी की कीमतें बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि जिन चीजों के वायदा कारोबार पर पाबंदी लगाई गई है उससे कीमतों पर कोई असर पड़ा है।


यह पूछे जाने पर कि क्या आवश्यक वस्तुओं के वायदा कारोबार पर पाबंदी लगाए जाने का कोई प्रस्ताव है, उन्होंने कहा कि संसद ने अभिजित सेन की अध्यक्षता में एक कमिटी गठित की थी। हमने पिछले साल कुछ वस्तुओं के वायदा कारोबार पर पाबंदी लगाई थी। हमने दाल, चावल और गेहूं के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन इससे इन चीजों की कीमतों पर असर नहीं पड़ा है। पवार ने कहा कि हमने देखा है कि हमारे देश ने उदारीकरण को स्वीकार कर लिया है और इसी वजह से कीमतें देश में निर्धारित नहीं होती, इस पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर पड़ता है।


पवार ने कहा कि सीटीटी लगाए जाने से वायदा कारोबार की लागत 3 रुपये प्रति लाख से बढ़कर 20 रुपये प्रति लाख हो जाएगी। इससे पूरा सिस्टम प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि ये ऐसा क्षेत्र है जहां अभी विकास की धारा बहनी बाकी है। मैं ताजा आंकड़े की चर्चा नहीं कर रहा हूं, लेकिन यह सालाना 40 लाख करोड़ को पार कर चुका है।


खाद्य और कृषि संस्था (एफएओ) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पवार ने कहा कि पूरी दुनिया के लोगों के सामने अगले एक दशक में गेहूं, दाल और चावल की कीमत काफी परेशानी भरी होगी। उन्होंने कहा कि इन चीजों की उपलब्धता बड़ी समस्या होगी।


पिछले साल हमने 100-110 डॉलर प्रति टन की दर गेहूं का आयात किया था, लेकिन पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 400 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने  हालांकि इस पर चिंता जताई कि ऐसी कीमतों से आम आदमी पर अच्छा खासा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत में गेहूं की कीमत दुनिया भर में सबसे कम है, अगर आप अंतरराष्ट्रीय बाजार से इसकी तुलना करें।

First Published - March 22, 2008 | 12:22 AM IST

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