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नेफेड ने बेची सोयाबीन, तो गिरा तेल-तिलहन बाजार; कारोबारियों में हड़कंप

हैरान करने वाली बात है कि खाद्य तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए 55% आयात पर निर्भर देश में किसानों की तिलहन फसल MSP से काफी कम दाम पर बिकी।

Last Updated- March 03, 2025 | 8:29 PM IST
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सहकारी संस्था नेफेड द्वारा सोयाबीन फसल की बुवाई से पहले, पूर्व में किसानों से खरीदे गई सोयाबीन फसल की बिक्री करने की दिशा में की गई पहल से बाजार में अफरा-तफरी फैलने के कारण अधिकांश तेल-तिलहन (सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल) के दाम गिरावट दर्शाते बंद हुए।

मंडियों में आवक घटने तथा उपलब्धता कम रहने के बीच क्रमश: मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे। बाजार सूत्रों ने कहा कि नेफेड की सोयाबीन बिक्री की पहल के कारण किसानों में घबराहट का माहौल कायम हो गया और पूरी की पूरी बाजार धारणा कमजोर होती चली गई।

अभी आगे सोयाबीन की बुवाई (जून-जुलाई से) शुरू होने के पहले नेफेड की यह बिक्री पहल, अगली बिजाई को प्रभावित करेगी क्योंकि इस बार उत्पादन बढ़ाने के बावजूद किसानों के सोयाबीन, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे दाम पर हाजिर बाजार में बिके हैं। उन्होंने कहा कि बिजाई के आगामी मौसम से पहले नेफेड की बिकवाली का औचित्य समझ से परे है। किसानों से अगर सोयाबीन थोड़ी बहुत मात्रा में खरीदा गया था तो उसे स्टॉक करना चाहिये था और बाजार बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिये था। अब अगली बार किसान किस धैर्य के साथ फसल बोयेंगे? क्या वे एक बार फिर अपनी फसल नहीं बिकने या एमएसपी से काफी नीचे दाम पर बेचने का जोखिम लेना चाहेंगे?

नेफेड की मौजूदा बिक्री पहल देश के तेल-तिलहन उद्योग की कमर तोड़ देगा, इस खतरे का अहसास सभी जिम्मेदार लोगों को होना चाहिये।
सूत्रों ने कहा कि इस बार देश में अधिकांश तिलहन फसलों की पैदावार कम है। खाद्य तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 55 प्रतिशत आयात पर निर्भर इस देश में देश के किसानों की तिलहन फसल एमएसपी से काफी कम दाम पर बिके, यह हैरान करने जैसा समीकरण है जिसे तत्काल दुरुस्त करने की ओर पहल करनी होगी नहीं तो तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना सपना ही बना रहेगा। आवक कम रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्ववत रहे जबकि उपलब्धता नहीं होने की वजह से बिनौला तेल के दाम भी पर पूर्व स्तर पर बने रहे।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,150-6,250 रुपये प्रति क्विंटल। मूंगफली – 5,600-5,925 रुपये प्रति क्विंटल। मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 14,300 रुपये प्रति क्विंटल। मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,200-2,500 रुपये प्रति टिन। सरसों तेल दादरी- 13,450 रुपये प्रति क्विंटल। सरसों पक्की घानी- 2,335-2,435 रुपये प्रति टिन। सरसों कच्ची घानी- 2,335-2,460 रुपये प्रति टिन। सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,100 रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,700 रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल। सीपीओ एक्स-कांडला- 13,100 रुपये प्रति क्विंटल। बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,450 रुपये प्रति क्विंटल। पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,650 रुपये प्रति क्विंटल। पामोलिन एक्स- कांडला- 13,600 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल। सोयाबीन दाना – 4,125-4,175 रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन लूज- 3,825-3,875 रुपये प्रति क्विंटल।

(एजेंसी इनपुट के साथ) 

First Published - March 3, 2025 | 8:29 PM IST

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