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बंगाल के आलू किसानों की हालत खस्ता

Last Updated- December 07, 2022 | 1:04 PM IST

पश्चिम बंगाल के आलू उत्पादकों की हालत भी उत्तर प्रदेश व हिमाचल के आलू उत्पादकों की तरह दयनीय हो चली है। उन्हें अपनी लागत मूल्य से भी कम कीमत पर आलू बेचना पड़ रहा है।


हालत ऐसी है कि बंगाल के उत्पादक अपने घाटे की पूर्ति के लिए दिल्ली की मंडियों में अधिक से अधिक आलू बेचने की पेशकश कर रहे हैं। आजादपुर मंडी में आलू के कारोबारी बैधनाथ कहते हैं, ‘ यहां तो पहले से ही आलू की अधिक आवक है।

उत्तर प्रदेश से आलू की आवक अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि हिमाचल प्रदेश से आलू आने लगा। पश्चिम बंगाल के एपीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक आलू के भाव में लगातार गिरावट हो रही है। वहां आलू की बिक्री 300-350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रही है। जुलाई के दूसरे सप्ताह में पश्चिम बंगाल में आलू की कीमत 346 रुपये प्रति क्विंटल थी।

हालांकि तीसरे सप्ताह में आलू में थोड़ी मजबूती दर्ज की गयी है और इसकी कीमत 376 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ पहुंची है। आलू व्यापारी कहते हैं, ‘अगर अन्य राज्यों में आलू मजबूत होता तो बंगाल के आलू भी इतने कमजोर नहीं होते। उत्तर प्रदेश व हिमाचल के आलू के कारण बंगाल के आलू की बिक्री दिल्ली की मंडी में बहुत ही कम मात्रा में हो रही है।’ आजादपुर मंडी के व्यापारियों के मुताबिक बंगाल में कई जगहों पर तो किसान आलू फेंक रहे हैं।

उनका कहना है कि तमाम कोल्ड स्टोरेज पहले से भरे हुए हैं और आलू का वायदा कारोबार भी बंद है। सभी जगहों पर आलू की बंपर पैदावार है। ऐसे में बंगाल के आलू के लिए बाजार नहीं निकल पा रहा है। इस साल मई महीने में उत्तर प्रदेश के आलू की कीमत 285 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गयी थी। इस साल देश भर में आलू का उत्पादन 115.30 मिलियन टन हुआ है। जो कि पिछले साल की कुल पैदावार से 30 फीसदी अधिक है।

First Published - July 25, 2008 | 12:34 AM IST

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