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गन्ना कीमतों को लेकर चीनी मिल पहुंचे सरकार के द्वार

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एक तरफ उत्पादन की लागत बढ़ी है, वहीं चीनी की कीमतों में दिसंबर 2024 के अंत तक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है।

Last Updated- January 16, 2025 | 11:31 PM IST
Sugarcane
प्रतीकात्मक तस्वीर

किसानों के असंतोष के सुगबुगाहट के बीच उत्तर प्रदेश की निजी चीनी मिलों ने राज्य सरकार से संपर्क कर गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में आगे कोई बढ़ोतरी न करने का अनुरोध किया है। मिलों का कहना है कि गिरते रिकवरी रेट की वजह से उत्पादन लागत तेजी से बढ़ी है, जिसे देखते हुए 2024-25 सीजन में गन्ने का दाम स्थिर रखा जाना चाहिए। चीनी सत्र अक्टूबर से सितंबर के बीच होता है।

सूत्रों ने कहा कि राज्य में सालाना उत्पादन में ज्यादा हिस्सा वाली निजी चीनी मिलों ने कहा कि 2024-25 चीनी सत्र में रिकवरी में 0.3 से 1.0 फीसदी तक की गिरावट आई है, जिसकी वजह उत्पादन लागत औसतन 140 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गई है (रिकवरी में 0.4 फीसदी औसत गिरावट मानें तो)। रिकवरी रेट गन्ने से चीनी की मिलने वाली मात्रा होती है। मिल मालिकों ने यह भी कहा है कि एक तरफ उत्पादन की लागत बढ़ी है, वहीं चीनी की कीमतों में दिसंबर 2024 के अंत तक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है।

उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड सरकार की अपनी कीमत है, जिस दर पर चीनी मिलें किसानों से गन्ना खरीदती हैं। इसे एसएपी कहा जाता है।
चीनी सत्र 2023-24 में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने की सभी किस्मों के लिए राज्य परामर्श मूल्य 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर शुरुआती किस्म की कीमत 370 रुपये प्रति क्विंटल कर दी थी।

उत्तर प्रदेश देश के बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में से एक है और यहां देश में निजी क्षेत्र की सर्वाधिक चीनी मिलें हैं। उत्तर प्रदेश की कुल 120 चीनी मिलों में से निजी क्षेत्र की 93 मिलें, सहकारी क्षेत्र की 24 मिलें और यूपी स्टेट शुगर कॉर्पोरेशन की 3 मिलें हैं। राज्य में करीब 50 लाख कृषक परिवार सीधे तौर पर गन्ने की खेती से जुड़े हुए हैं और गन्ने के सह उत्पादों चीनी, एथनॉल, मोलैसिस आदि से राज्य में 50,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।

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First Published - January 16, 2025 | 11:27 PM IST

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