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पुर्जा-पुर्जा हुए कल-पुर्जे

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Last Updated- December 07, 2022 | 9:04 AM IST

स्टील व लोहे की गरमी से देसी ऑटोमोबाइल पाट्र्स का निर्यात पिछले छह महीनों में 90 फीसदी तक पिघल गया है।


आने वाले समय में निर्यात बाजार में किसी सुधार की गुंजाइश भी नजर नहीं आ रही है। पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी के साथ बड़ी कंपनियों से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण देसी ऑटोमोबाइल पाट्र्स के बाजार में दो महीनों के दौरान 15-18 फीसदी तक की गिरावट आयी है। कार लोन की ब्याज दरों में होने वाली बढ़ोतरी के कारण कारोबार में और कमी आने की आशंका है।

कश्मीरी गेट स्थित ऑटोमोबाइल पाट्र्स के कारोबारियों का कहना है कि वर्ष 2007 के दिसंबर महीने तक दिल्ली के ऑटोमोबाइल बाजार से लगभग1500 करोड़ रुपये का निर्यात हो रहा था। लेकिन अब यह घट कर मात्र 150 करोड़ रुपये का रह गया है। दिल्ली के ऑटोमोबाइल बाजार से यूरोप, मध्य पूर्व व अफ्रीका देशों में मुख्य रूप से निर्यात किया जाता है। दिल्ली के ऑटोमोबाइल पाट्र्स मर्चेंट एसोसिएशन (अपमा) के उपाध्यक्ष संजीव आहूजा कहते हैं, ‘हमारा बाजार अंतरराष्ट्रीय जगत से लगभग उखड़ा चुका है।

हमारी कीमतें ज्यादा होने के कारण विदेशी बाजार में मंजूर नहीं की जा रही है। चीन इस बाजार पर कब्जा जमा रहा है।’ पिछले छह महीने के दौरान स्टील की कीमतों में 60 फीसदी तो लोहे की कीमत में लगभग 50 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। आहूजा कहते हैं कि पिछले साल तक चीन व भारत की कीमतों में 20 फीसदी तक का अंतर था जो बढ़कर 50 फीसदी तक हो गया है। उनका यह भी कहना है कि ऑटोमोबाइल पाट्र्स के निर्यातकों को भारत में जहां 7-10 फीसदी की रियायत दी जा रही है वही चीन में इन निर्यातकों को 15-28 फीसदी तक की रियायत मिलती है।

बढ़ती लागत व बड़ी कंपनियों से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा से ऑटोमोबाइल पाट्र्स के देसी बाजार में भी पिछले दो महीनों से गिरावट का दौर जारी है। अपमा के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र मदान कहते हैं, ‘पेट्रोल की कीमत में बढ़ोतरी के बाद पुरानी गाड़ियों की बिक्री प्रभावित हुई है। और हमारा कारोबार पुरानी गाड़ियों से ही चलता है।’ उनका यह भी कहना है कि पाट्र्स की लागत बढ़ने के बावजूद बड़ी कंपनियों ने कीमतें नहीं बढ़ायी हैं। ऐसे में बाजार का डगमगाना लाजिमी है।

कारोबारियों के मुताबिक जुलाई महीने से अधिकतर बैंकों ने कार लोन की ब्याज दरों में .5 से 1 फीसदी तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है। निश्चित रूप से इससे कार की खरीदारी में कमी होगी। नई कार में लगने वाले अतिरिक्त चीजों का बाजार कश्मीरी गेट में ही है। कश्मीरी गेट में ऑटोमोबाइल पाट्र्स की लगभग 10,000 दुकानें हैं। कश्मीरी गेट की दुकानों से पाट्र्स खरीद कर नयी कार बनायी जा सकती है।

देसी ऑटोमोबाइल पाट्र्स के निर्यात में छह माह के दौरान 90 फीसदी की गिरावट
यूरोप, मध्य-पूर्व और अफ्रीकी देशों को किया जाता है निर्यात

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First Published - July 3, 2008 | 11:21 PM IST

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