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खाद्य तेलों पर आयात शुल्क लगे : एसईए

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Last Updated- December 08, 2022 | 12:42 AM IST

आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी से आ रही गिरावट और पिछले तीन महीने में रुपये के मूल्य में आई कमी को देखते हुए सॉल्वेंट एक्सटैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने खाद्य तोलों पर आयात शुल्क लगाए जाने की मांग की है।


इसके अतिरिक्त एसईए ने तिलहन और तेलों के सीमित भंडार रखने और खाद्य तेलों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने की गुजारिश भी की है। इसने सोयाबीन तेलों के वायदा कारोबार को फिर से शुरू करने की मांग सरकार से की है।

कृषि मंत्री शरद पवार और वित्त मंत्री पी चिदंबरम के साथ-साथ वाणिज्य मंत्री कमल नाथ को भेजे गए एक ज्ञापन में एसोसिएशन ने कहा है कि वर्तमान में आयातित खाद्य तेलों की कीमत दो साल पहले (अक्टूबर 2006) की कीमतों से काफी कम है। उस समय 88.8 प्रतिशत, 78.2 प्रतिशत और 50.8 प्रतिशत का आयात शुल्क क्रमश: आरबीडी पामोलीन, कच्चे पाम तेल और सोयाबीन तेल पर लगाया जाता था।

एसईए के अध्यक्ष अजय सेतिया ने अपने बयान में कहा, ‘हम सरकार से आयात शुल्कों की समीक्षा करने की सिफारिश करते हैं और चाहते हैं कि कच्चे पाम तेल पर कम से कम 30 प्रतिशत, आरबीडी पामोलीन पर 37.5 प्रतिशत और कच्चे सोयाबीन पर 20 प्रतिशत का शुल्क लगाया जाए। वर्तमान में कच्चे तेलों पर कोई आयात शुल्क नहीं लगाया जा रहा है और रिफाइंड तेलों पर यह 7.5 प्रतिशत की दर से लगाया जा रहा है।’

उन्होंने कुछ राज्यों जैसे महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश कर्नाटक आदि का हवाला देते हुए कहा कि इन राज्यों ने तिलहन और तेलों का भंडार सीमित रखी जा रही है। उन्होंने कहा, ‘भंडार की इस सीमा को तत्काल खत्म किया जाना चाहिए ताकि उद्योग खरीदारी कर सके और इस प्रकार किसानों को मदद मिल सके।’

एसईए के अनुसार, चालू वर्तमान सीजन में मूंगफली के  उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी होने की संभावना है और 50 से 52 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है। एसईए ने ज्ञापन में कहा है, ‘मूंगफली के तेल के निर्यात से कीमतों में आ रही गिरावट थमेगी और इसलिए सरकार से हमारी अपील है कि वह खाद्य तेलों के उपभोक्ता पैकों और थोक में निर्यात करने की अनुमति जल्द से जल्द दे।’इसके अतिरिक्त एसईए ने तत्काल प्रभाव से सोयाबीन तेल का वायदा कारोबार शुरू करने के लिए भी सरकार से गुजारिश की है।

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First Published - October 17, 2008 | 11:02 PM IST

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