facebookmetapixel
IT शेयरों में कोहराम: AI के बढ़ते प्रभाव से हिला निवेशकों का भरोसा, एक हफ्ते में डूबे ₹6.4 लाख करोड़NBFCs के लिए RBI की बड़ी राहत: ₹1000 करोड़ से कम संपत्ति वाली कंपनियों को पंजीकरण से मिलेगी छूटRBI Monetary Policy: रीपो रेट 5.25% पर बरकरार, नई GDP सीरीज आने तक ‘तटस्थ’ रहेगा रुखट्रंप ने फिर किया दावा: मैंने रुकवाया भारत-पाकिस्तान के बीच ‘परमाणु युद्ध’, एक दिन में दो बार दोहरायाइस्लामाबाद में बड़ा आत्मघाती हमला: नमाज के दौरान शिया मस्जिद में विस्फोट, 31 की मौतखरगे का तीखा हमला: पीएम के 97 मिनट के भाषण में कोई तथ्य नहीं, सवालों से भाग रही है सरकारलोक सभा में गतिरोध बरकरार: चीन का मुद्दा व सांसदों के निलंबन पर अड़ा विपक्ष, बजट चर्चा में भी बाधाडिजिटल धोखाधड़ी पर RBI का ऐतिहासिक फैसला: अब पीड़ितों को मिलेगा ₹25,000 तक का मुआवजाPariksha Pe Charcha 2026: PM मोदी ने छात्रों को दी सलाह- नंबर नहीं, स्किल व बेहतर जीवन पर दें ध्याननागालैंड में क्षेत्रीय प्राधिकरण के गठन को मिली त्रिपक्षीय मंजूरी, PM मोदी ने बताया ‘ऐतिहासिक’

FY26 की पहली छमाही में रुपये पर रहा गिरावट का दबाव, अब तक 3.7% कमजोर हुआ

मंगलवार को यह 88.79 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह लगातार दूसरे सत्र में डॉलर के मुकाबले नया निचला स्तर है

Last Updated- September 30, 2025 | 9:52 PM IST
Rupee vs Dollar

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान रुपये पर गिरावट का दबाव जारी रहा और डॉलर के मुकाबले रुपया नए निचले स्तर पर पहुंच गया। इसकी वजह डॉलर में मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी पूंजी की निकासी है। मौजूदा वित्त वर्ष में रुपया अब तक 3.7 फीसदी नरम हुआ है जबकि अप्रैल में उसने अच्छी शुरुआत की थी।

पहली तिमाही के दौरान स्थानीय मुद्रा में उतार-चढ़ाव रहा। लेकिन अंततः वह अवधि काफी हद तक स्थिर रही और रुपये में डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी कमजोर रही। मंगलवार को यह 88.79 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह लगातार दूसरे सत्र में डॉलर के मुकाबले नया निचला स्तर है।

हालांकि, दूसरी तिमाही के दौरान बाहरी और घरेलू दोनों तरह की चुनौतियों के कारण रुपये पर गिरावट का दबाव बढ़ा । भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका के जवाबी शुल्कों के लागू होने और इसमें इजाफे, कुछ सेक्टरों में प्रभावी शुल्क 50 फीसदी तक कर दिए गए, ने भारतीय बाजारों के प्रति निवेशकों की धारणा को कमजोर कर दिया।

एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा, पहली छमाही में रुपये पर दबाव का मुख्य कारण अमेरिकी टैरिफ थे। उन्होंने कहा, दूसरी तिमाही में आरबीआई का हस्तक्षेप कम रहा। उन्होंने तीव्र उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए कभी-कभी डॉलर बेचे, लेकिन ज्यादातर समय रुपये को बाजार की ताकतों के अनुसार चलने दिया। दूसरी ओर, बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में स्थिर रहा जबकि दूसरी तिमाही में इसमें करीब 23 आधार अंकों की वृद्धि हुई, जिससे पहली तिमाही के लाभ में कमी आई।

वर्ष की पहली छमाही में बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल में 3 आधार अंकों की गिरावट आई। बाजार के प्रतिभागियों ने बताया कि आपूर्ति दबाव और केंद्रीय बैंक के खुले बाजार परिचालन न करने से दूसरी तिमाही में प्रतिफल में वृद्धि हुई। नीतिगत दरों में कटौती, आरबीआई द्वारा नकदी बढ़ाने और घरेलू निवेशकों की मजबूत मांग के कारण सभी परिपक्वता अवधि के सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल शुरुआत में दबाव में रहा।

First Published - September 30, 2025 | 9:50 PM IST

संबंधित पोस्ट