facebookmetapixel
त्योहारी मांग और नीतिगत समर्थन से ऑटो सेक्टर रिकॉर्ड पर, यात्री वाहन बिक्री ने बनाया नया इतिहासTata Motors मजबूत मांग के बीच क्षमता विस्तार पर दे रही जोर, सिएरा और पंच फेसलिफ्ट से ग्रोथ को रफ्तार!अधिग्रहण से अगले वर्ष रेवेन्यू 1.5 फीसदी बढ़ेगा, 5G और एआई पर दांव: एचसीएलटेकक्विक कॉमर्स में अब नहीं होगी ‘10 मिनट में डिलिवरी’! गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर सरकार सख्तईरान से व्यापार करने वाले देशों पर ट्रंप का 25% टैरिफ, भारत के बासमती चावल और चाय निर्यात पर मंडराया खतराबजट से पहले क्रिप्टो एक्सचेंजों पर सख्त नियमों की तैयारी, सेबी को मिल सकती है बड़ी नियामकीय भूमिका!Editorial: जर्मन चांसलर मैर्त्स की भारत यात्रा से भारत-ईयू एफटीए को मिली नई रफ्तारवीबी-जी राम जी का बड़ा बदलाव: ग्रामीण बीमा से मैनेज्ड इन्वेस्टमेंट की ओर कदमग्लोबल AI सिस्टम की नई पटकथा लिखी जा रही है, भारत के समक्ष इतिहास रचने का मौकाबाजारों ने भू-राजनीतिक जोखिमों को ध्यान में नहीं रखा, घरेलू मांग बनेगी सुरक्षा कवच

दीवाली तक होंगी दालें और महंगी

Last Updated- December 07, 2022 | 8:49 PM IST

इस सीजन में दलहन के रकबे में कमी होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दलहन की कीमतों में लगातार हो रही मजबूती से उम्मीद की जा रही है कि दीपावली तक तुअर और उड़द दाल की कीमतों में खासी बढ़ोतरी हो जाएगी।


जानकारों के मुताबिक, अगले कुछ महीनों में अरहर और उड़द जैसी दालों की कीमत में लगभग 10 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है। गौरतलब है कि इस साल अब तक अरहर की कीमतें 53 और उड़द की 48 फीसदी बढ़ चुकी हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस बार उड़द की 21 फीसदी और तुअर की 15 फीसदी कम बुआई हुई है।

कहीं कम तो कहीं ज्यादा बारिश से इस बार दलहन की फसल कमजोर होने की बात कही जा रही है। पिछले साल अगस्त में तुअर दाल की औसत कीमत 2,570 रुपये प्रति क्विंटल थी जबकि उड़द 2479 रुपये में मिल रहा था। फिलहाल तुअर 3150 रुपये और उड़द 3030 रुपये प्रति क्विंटल में बिक रहा है।

बाजार में दलहन की कीमतों में हुई वृद्धि को देखते हुए सरकार ने भी दलहन की एमएसपी में इजाफा कर दिया है। वर्ष 2007-08 में तुअर दाल की एमएसपी जहां 1,550 रुपये प्रति क्विंटल थी वहीं 2008-09 में इसमें 29 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई।इसी प्रकार उड़द की एमएसपी भी 48 फीसदी बढ़ाकर 1,700 रुपये प्रति क्विंटल की बजाए 2500 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

जानकार बताते हैं कि किसानों की दलहन फसल में दिलचस्पी बढ़ाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। पल्सेज इंपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के. सी. भरतिया कहते हैं कि पिछले 15 सालों से दलहन की कीमतों में कोई खास वृद्धि न होने से इसके उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसलिए दलहन की एमएसपी में की गई बढ़ोतरी बहुत जायज है।

इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में दलहन की कीमतें बढ़ रही हैं जिससे भारतीय बाजार अछूते नहीं रह सकते। बाजार में मौजूद स्टॉक और परिस्थितियों को आधार माना जाए तो आने वाले दो-तीन महीनों के अंदर दलहन की कीमतों में 5 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।

गौरतलब है कि दलहन की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने इसके वायदा कारोबार पर जनवरी 2007 से रोक लगा रखी है। रोक लगाये जाने के समय उड़द की कीमत 2,687 रुपये थी।

First Published - September 13, 2008 | 12:22 AM IST

संबंधित पोस्ट