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डिलिवरी में चूक पर जुर्माना अब तीन फीसदी

Last Updated- December 07, 2022 | 9:08 PM IST

कमोडिटी एक्सचेंजों में डिलीवरी डिफॉल्टों के बढ़ते मामलों से चिंतित वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) ने पेनाल्टी बढ़ाकर तीन फीसदी करने का निर्णय किया है।


साथ ही आयोग ने एक्सचेंजों को जिंसों की डिलीवरी करने के लिए अधिकृत किया है। एफएमसी के अध्यक्ष बी.सी. खटुआ ने बताया, ‘खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए हमने जुर्माना को बढ़ाकर तीन फीसदी कर दिया है जो पहले ढाई फीसदी था।’

उन्होंने कहा कि पहले प्रभावित पक्ष डिफाल्टर (खरीदार एवं विक्रेता) से अनुबंधित राशि का आधा फीसदी प्राप्त करने का हकदार था। जुर्माना बढ़ाए जाने के बाद अब प्रभावित पक्ष को एक फीसदी मिलेगा। उन्होंने कहा कि शेष दो फीसदी हिस्सा एक्सचेंज के निवेशक संरक्षण फंड में जाएगा। खटुआ ने कहा कि नए नियम अक्तूबर से लागू होंगे।

पेनाल्टी के अलावा एफएमसी ने एक्सचेंजों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि यदि सामान भंडारगृह में है तो वे जिंसों की डिलीवरी अपने प्लेटफार्म पर करें। खटुआ ने कहा, ‘यदि एक विक्रेता ने जिंस को एक्सचेंज द्वारा मान्यता प्राप्त भंडारगृह में जमा किया है तो एक्सचेंज खरीदार को इसकी डिलीवरी की व्यवस्था कराने के लिए अधिकृत हैं।

नियामक, जिसने सभी कमोडिटी एक्सचेंजों को एक परिपत्र जारी किया है, ने वास्तविक खरीदारों को विक्रेताओं से डिलीवरी नहीं मिलने के मामलों के लिए कुछ अतिरिक्त उपाय भी किए हैं। एफएमसी के अध्यक्ष ने कहा कि खरीदारी मूल्य की अस्थिरता से करार की समाप्ति के बाद भी सुरक्षित रहेंगे।

खटुआ ने कहा, ‘करार की समाप्ति के बाद एक खरीदार को मूल्य में अंतर की जांच के लिए पांच दिनों का समय मिलेगा। करार की समाप्ति के बाद एक्सचेंज पांच दिनों के औसत मूल्य लेकर कमोडिटी की डिलीवरी से पहले इसका मिलान सेट्लमेंट मूल्य से करेंगे।’

उन्होंने कहा कि मान लीजिए औसत मूल्य और सेट्लमेंट मूल्य के बीच कोई अंतर होता है तो इसका वहन खरीदारों द्वारा किया जाएगा और स्वस्थ कारोबारी क्रियाकलापों की सुनिश्चतता के लिएसभी विकल्पों की विस्तार से जांच की जाएगी।

पहले एफएमसी नीलामी प्रक्रिया के जरिये डिलीवरी सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा था। हालांकि, इस विचार को त्यागना पड़ा क्योंकि राज्य सरकारों की नियामकीय सीमाएं थीं। डिलीवरी डीफॉल्ट के संदर्भ में कारोबारियों और निर्यातकों से शिकायत मिलने के बाद नियामक ने वास्तविक कारोबारियों के हितों की रक्षा के लिए कई उपाय करने का निर्णय लिया।

First Published - September 17, 2008 | 12:14 AM IST

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