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खतरों से खेलने के बाद ही मिलेगा नाल्को को फायदा

Last Updated- December 07, 2022 | 9:45 AM IST

इस देश के सरकारी संस्थानों की खतरे न उठाने की जो प्रवृत्ति है, वह नैशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (नाल्को) नियंत्रित एशिया के सबसे बड़े एकीकृत एल्युमिना कॉम्पलेक्स के मामले में भी दिखाई देती है।


यदि यह कंपनी अभी के मुकाबले थोड़ा और खतरा उठाए तो उसे अभी की तुलना में कुछ फायदे ही होंगे, नुकसान की गुंजाइश कम ही है। नाल्को को चाहिए कि वो अपने स्मेल्टर में पड़े एल्युमिना के ज्यादातर सरप्लस भंडार को ठेके  के जरिए दुनिया के हाजिर बाजार में बेचे।

पिछले 5 सालों के दौरान, सभी ने देखा कि किस तरह एल्युमिना का हाजिर मूल्य सावधि कांट्रैक्ट मूल्य, जिस पर नाल्को अपने उत्पाद बेचा करता है, से ज्यादा रहा है। कुछ दिनों पहले नाल्को ने जो एल्युमिना के भंडार बेचे थे, उसकी फ्री ऑन बोर्ड (एफओबी) कीमत कड़ी बोली के बाद 457.57 डॉलर प्रति डॉलर लगायी गयी। हमने देखा कि एल्युमीनियम बहरीन की बोली दूसरे नंबर पर रही और यह प्रति टन 455 डॉलर की दर से बिका। कड़ी बोली से साबित होता है कि आपूर्ति में दिक्कत के चलते एल्युमिना के भाव को समर्थन मिल रहा है।

चीन के आयात में कमी

नाल्को के विपणन निदेशक पी. के. परीदा ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में एल्युमिना की तीन बार बिक्री हुई है और वो 403.09 डॉलर, 422.77 डॉलर और 425 डॉलर की दर से हुई है। मजे की बात है कि चीन की ओर से इस साल के शुरूआती 4 महीनों में मांग में कमी होने के बावजूद एल्युमिना की कीमत में वृद्धि हुई है। वहां इस साल के शुरुआती 4 महीनों में अल्युमिना के आयात में 3 लाख टन की कमी हुई है।

चीन द्वारा एल्युमिना के आयात में हुई इस कमी की वजह यहां के एल्यमिनियम उत्पादन करने वाले कई प्रांतों जैसे-सिचुआन और गिझाऊ में एल्युमिनियम तैयार करने वाले स्मेल्टरों के सामने आयी दिक्कतें हैं। यहां बर्फबारी और बिजली की किल्लत के चलते इन स्मेल्टरों के क्रियाकलाप पर काफी असर पड़ा, जिससे एल्युमिना की खपत में कमी आयी है। स्मेल्टरों तक एल्युमिना की पहुंच एक मुद्दा ही बन गया था। इन इलाकों में रेलवे बैगन पहुंच ही नहीं पा रहे थे। बर्फबारी से प्रभावित इलाकों में खाद्य सामग्रियों का पहुंचाना बहुत जरूरी था। एल्युमिना की आपूर्ति तो प्राथमिकता सूची में बहुत बाद आता था।

बेहतर भविष्य

चीन में पाए जाने वाले खराब क्वालिटी के बॉक्साइट के बावजूद चीन ए ल्युमिना उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर होना चाहता है। चीन की अधिकांश रिफाइनरियां आयातित बॉक्साइट के ऊपर निर्भर करती है। पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि चीन की न केवल एल्युमिना रिफाइनिंग बल्कि धातु स्मेल्टिंग क्षमता में भी तेजी से वृद्धि ह 4 से चीन की एल्युमिना उत्पादन क्षमता 70 लाख टन से बढ़कर 2.4 करोड़ टन हो गई है। इसकी धातु उत्पादन क्षमता भी 50 लाख अन से बढ़कर 1.5 करोड़ टन हो गई है।

नाल्को के कार्यकारी निदेशक पी. के. पाधी ने बताया कि भारत की तुलना में देखें तो चीन में कोई प्लांट लगाने में काफी कम समय लगता है। हमारे यहां कोई संयंत्र जहां 4 साल में लग पाता है, वहीं चीन में एल्युमिना रिफाइनिंग 12 महीनों में और एक स्मेल्टर 18 महीनों में ही तैयार हो जाता है। कारोबारियों के अनुसार, बाजार की पहले से ही धारणा रही है कि इस साल चीन का एल्युमिना आयात कम रहेगा।

First Published - July 8, 2008 | 3:24 AM IST

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