facebookmetapixel
Advertisement
वैश्विक तनाव के बीच आर्थिक हालातों की समीक्षा करेगी स्टैंडिंग कमेटी, RBI ने जताया है सुस्ती का अनुमान1250% का मोटा डिविडेंड! प्लास्टिक बनाने वाली कंपनी का बड़ा तोहफा, रिकॉर्ड डेट इसी हफ्तेमौसम का डबल अटैक: कहीं भारी बारिश व आंधी-तूफान का अलर्ट, तो कहीं अभी और सताएगी भीषण गर्मीसोने-चांदी की मंदी पर ‘Rich Dad, Poor Dad’ के लेखक की बड़ी सलाह: कीमत नहीं, हालात देखकर करें निवेश‘योग बना दुनिया का सबसे बड़ा सामूहिक उत्सव’, कोलकाता में बोले PM मोदी: उम्र बढ़े पर कम न हो ऊर्जाकिसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: पीएम मोदी ने जारी की PM-Kisan की 23वीं किस्त, ऐसे चेक करें स्टेटसकेंद्र सरकार ने 16 FDC दवाओं पर लगाया परमानेंट बैन, कई स्किन क्रीम और एंटीबायोटिक भी लिस्ट मेंसावधान! ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड का हुए शिकार तो तुरंत करें ये काम, वरना डूब जाएगा पूरा पैसा; जानें RBI के नियमDividend Stocks: टाटा पावर और LIC समेत ये 31 कंपनियां अगले हफ्ते बांटेंगी मुनाफा, देखें पूरी लिस्टट्रंप ने की पीएम मोदी की जमकर तारीफ, बोले: 150 करोड़ लोगों का यह नेता है असली ‘टफ कुकी’

इंडोनेशिया हुआ ओपेक से बाहर

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 8:43 PM IST

ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में हो रही ओपेक की बैठक में इंडोनेशिया को ओपेक की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है।


ओपेक द्वारा जारी एक वक्तव्य में बताया गया कि इंडोनेशिया के अनुरोध को देखते हुए ओपेक ने इसकी सदस्यता निलंबित करने का फैसला किया है। हालांकि समूह ने आशा जताई कि इंडोनेशिया फिर कभी ओपेक का सदस्य बन पाएगा।

गौरतलब है कि इंडोनेशिया ओपेक का एकमात्र एशियाई सदस्य देश था। ओपेक के प्रवक्ता के अनुसार, ओपेक के दो सदस्य देशों इंडोनेशिया और इराक की जगह अब अंगोला और इक्वाडोर को ओपेक में शामिल किया गया है। प्रतिदिन 8.65 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले इंडोनेशिया के हटने से अब ओपेक का तेल उत्पादन कोटा 2.88 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गया है।

इंडोनेशिया के हटने से पहले ओपेक का तेल उत्पादन 2.967 करोड़ बैरल प्रतिदिन था। इंडोनेशिया के ऊर्जा और खनिज मंत्री पुर्णोमो युस्गिंतोरो ने बताया कि अब उनका देश तेल निर्यातक की बजाय आयातक बन गया है। यदि भविष्य में इंडोनेशिया कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने में सफल रहा तो वह फिर से ओपेक का सदस्य बन सकता है।

मालूम हो कि इंडोनेशिया 1961 में ओपेक में शामिल हुआ था। लेकिन कई साल से घटते विदेशी निवेश के चलते यह देश अपना उत्पादन बढ़ा पाने में असफल रहा है। इंडोनेशियाई अधिकारियों का ओपेक पर आरोप है कि वह छोटे देशों की उपेक्षा कर रहा है।

ओपेक की उपेक्षा का ही असर है कि इंडोनेशिया जैसे छोटे देश अपना उत्पादन बढ़ाने में नाकाम रहे हैं। जानकारों के अनुसार वहां की पूर्ववर्ती सरकारों ने देश के तेल और गैस के प्रचुर भंडार का ठीक से प्रबंधन नहीं किया। मौजूदा स्थिति उसी का दुष्परिणाम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निलंबन इस बात की चेतावनी है कि इंडोनेशिया को अपने तेल उत्पादन की बुनियादी ढांचों पर निवेश बढ़ाना चाहिए।

Advertisement
First Published - September 11, 2008 | 12:01 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement