facebookmetapixel
Advertisement
ट्रंप के यू-टर्न से टूटा कच्चे तेल का बाजार, ब्रेंट 4% से ज्यादा और WTI 5% से ज्यादा लुढ़काStock Market Today: GIFT Nifty में 100 से ज्यादा अंकों की तेजी के संकेत, एशियाई बाजारों में गिरावट; कच्चा तेल करीब 5% फिसलामहिंद्रा की इलेक्ट्रिक SUV ने पलटी बाजी! घाटे से निकलकर पहली तिमाही में ₹288 करोड़ के मुनाफे से किया बड़ा धमाकाStocks To Watch Today: SEBI की बड़ी कार्रवाई, USFDA से मंजूरी और करोड़ों के ऑर्डर… आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजरकेसरिया जर्सी पर विवाद, भारतीय हॉकी की नीली पहचान पर बहसट्रंप का दावा: युद्ध खत्म करने के समझौते की रूपरेखा तैयार, फिलहाल हमले टलेयुवाओं पर पीएम मोदी का फोकस, नशा-मुक्त भारत अभियान के तहत लाखों युवाओं को दिलाई नशा विरोधी शपथअमेरिका में दवा बनाने की जल्दी नहीं, टैरिफ के खतरे के बावजूद भारत में ही रहेगा कंपनियों का विनिर्माणउदारीकरण के 35 साल: 1991 में सेंसेक्स में थीं जो 30 कंपनियां, उनमें अब 7 ही बचीं; बेंचमार्क सूचकांक में आया बड़ा बदलावबिज़नेस स्टैंडर्ड सर्वेक्षण: रीपो दर में बदलाव के नहीं आसार, अगली बैठक में हो सकता है बड़ा फैसला

कच्चे तेल का आयात बिल स्थिर, कीमतों में नरमी से भारत को राहत

Advertisement

भारत ने इस महीने के दौरान  211 लाख टन कच्चे तेल का आयात किया, जो पिछले साल की समान अवधि में आयात किए गए 189 लाख टन की तुलना में काफी अधिक है।

Last Updated- December 19, 2025 | 9:29 AM IST
crude oil
Representational Image

नवंबर महीने में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कच्चे तेल आयात की मात्रा में 11 प्रतिशत बढ़ी ही, जबकि आयात बिल यथावत रहा है।
पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर में देश का तेल आयात बिल 9.9 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले की तुलना में अपरिवर्तित है। भारत ने इस महीने के दौरान  211 लाख टन कच्चे तेल का आयात किया, जो पिछले साल की समान अवधि में आयात किए गए 189 लाख टन की तुलना में काफी अधिक है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक आपूर्ति के डर के कारण 2025 में कच्चे तेल की कीमत कम रही है। इसकी वजह से अधिक तेल खरीद के बावजूद भारत का आयात बिल कम रहा।   भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत नवंबर 2025 के दौरान औसतन 64.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि पिछले साल यह 73.02 डॉलर प्रति बैरल थी। अप्रैल से नवंबर की अवधि के दौरान देश के कच्चे तेल का आयात बिल लगभग 12 प्रतिशत घटकर 80.9 अरब डॉलर रह गया।

आपूर्ति की अधिकता के डर और यूक्रेन व रूस के बीच शांति समझौते की उम्मीदों के बीच बेंचमार्क ब्रेंट इस सप्ताह की शुरुआत में गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जो पिछले 5 वर्षों में सबसे कम है। कच्चे तेल की कीमतों में 2026 में भी नरमी रहने की संभावना है क्योंकि पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन और उसके सहयोगी (या ओपेक प्लस) और अमेरिका जैसे उत्पादक देश घटती वैश्विक मांग के बावजूद बाजार हिस्सेदारी पाने की जंग में उत्पादन को बढ़ावा देने को तत्पर हैं।

रिस्टेड एनर्जी के मुख्य अर्थशास्त्री क्लाउडियो गैलिम्बर्टी ने कहा, ‘चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में आई उछाल के कारण तेल की मांग में कमी आई है और साथ ही व्यापक तौर पर वैश्विक आपूर्ति बढ़ रही है। साथ ही रूस पर लगे प्रतिबंधों में ढील की संभावना है। इन वजहों से तेल व गैस दोनों की कीमतें नीचे जाने का जोखिम है।

नवंबर में भारत के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात बिल भी 1.2 अरब डॉलर पर स्थिर रहा, जबकि आयात मात्रा में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। भारत ने इस महीने में 2,844 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एमएमएससीएम) एलएनजी का आयात किया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 2,712 एमएमएससीएम का आयात किया था।

नवंबर में तेल और गैस आयात का शुद्ध बिल 4.12 प्रतिशत घटकर 9.3 अरब डॉलर रह गया। भारत के लिए ऊर्जा की कम कीमतें एक बड़ी राहत है, क्योंकि देश कच्चे तेल की कुल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की जरूरतों का 50 प्रतिशत आयात करता है।

Advertisement
First Published - December 19, 2025 | 9:29 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement